दैनिक वेतनभोगी कर्मचारियों की बहाली पर हाई कोर्ट का बड़ा फैसला, राज्य शासन की अपील खारिज

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YASHBHARAT.COM जबलपुर: दैनिक वेतनभोगी कर्मचारियों की बहाली के मामले में हाई कोर्ट ने राज्य शासन को झटका देते हुए उसकी रिट अपील निरस्त कर दी है। न्यायमूर्ति विवेक रूसिया और न्यायमूर्ति प्रदीप मित्तल की युगलपीठ ने 28 सितंबर 2026 को पारित आदेश में स्पष्ट किया कि समान कानूनी विवाद पर पहले दिए गए निर्णय के सिद्धांत इस मामले में भी लागू होंगे।

 

दैनिक वेतनभोगी कर्मचारियों की बहाली का मामला क्या है?

 

यह मामला दुर्गेश कुमार सोनी सहित अन्य कर्मचारियों से जुड़ा है। हाई कोर्ट की एकलपीठ ने 10 सितंबर 2025 को याचिका स्वीकार करते हुए कर्मचारियों के पक्ष में आदेश पारित किया था। इस फैसले को चुनौती देते हुए राज्य शासन ने हाई कोर्ट में रिट अपील दायर की थी।

 

सुप्रीम कोर्ट से खारिज हो चुकी थी याचिका

 

सुनवाई के दौरान हाई कोर्ट की युगलपीठ ने पाया कि इसी तरह के कानूनी मुद्दे पर समन्वय पीठ 17 जनवरी 2025 को पहले ही निर्णय दे चुकी है। राज्य शासन ने उस फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी, लेकिन 21 सितंबर 2026 को विशेष अनुमति याचिका खारिज कर दी गई थी।

 

हाई कोर्ट ने क्यों निरस्त की राज्य शासन की अपील?

 

पूर्व में दिए गए न्यायिक निर्णय और सुप्रीम कोर्ट के आदेश को ध्यान में रखते हुए युगलपीठ ने राज्य शासन की रिट अपील निरस्त कर दी। मामले में कर्मचारियों की ओर से अधिवक्ता नर्मदा प्रसाद चौधरी ने पैरवी की, जबकि राज्य शासन की ओर से शासकीय अधिवक्ता पीयूष जैन उपस्थित हुए।