भोपाल। राजधानी के हर घर में अब न फटने वाले सिलेंडर होंगे। एक प्राइवेट गैस एजेंसी ने इस तरह के सिलेंडरों की सप्लाई शुरू कर दी है। इन सिलेंडरों की खास बात यह है कि ये पूरी तरफ फाइबर के बने हुए हैं।
आग लगने की स्थिति में सिलेंडर के अंदर मौजूद कैमिकल गैस को स्वतः ही समाप्त कर देगा, जिससे हादसा टल जाएगा। जल्द ही हिंदुस्तान पेट्रोलियम और भारत गैस इस तरह के सिलेंडरों की घर-घर सप्लाई शुरू करेगा।
रसोई गैस पूर्ण रूप से पेट्रोलियम पदार्थ से बनी है, लिहाजा यह अतिज्वलनशील होती है। इस कारण रसोई गैस के रिसाव के बाद आग लगने और धमाका होने से बड़े स्तर पर नुकसान होता है। जान-माल की भी हानि होती है। लेकिन राजधानी में अब ऐसे सिलेंडर आ गए हैं, जिनमें धमाका होगा ही नहीं। इस सिलेंडर को बनाने में ऐसे मटेरियल का उपयोग किया गया है, जो धमाके को पूरी तरह से रोकने में सक्षम होगा।
पारदर्शी सिलेंडर, पता चलेगा कितनी गैस बची है
ये सिलेंडर पूरी तरह से पारदर्शी भी होगा। लिहाजा, सिलेंडर में मौजूद गैस के बारे में आपको जानकारी होगी कि इसमें कितनी गैस बची है। उसके हिसाब से आप अगले सिलेंडर की बुकिंग करा सकते हैं। एक प्राइवेट कंपनी ने इस खास सिलेंडर की भोपाल में सप्लाई भी शुरू कर दी है। इसकी बाडी फाइबर से बनी है और इसका वजन भी काफी कम है। करीब 2400-2450 रुपए में मिलने वाले पुराने गैस सिलेंडर को ग्राहक 950 से 1000 रुपए देकर बदल सकते हैं। नए पारदर्शी सिलेंडर गरीबी रेखा के नीचे जीवन-यापन करने वाले उपभोक्ताओं के लिए मुफ्त उपलब्ध कराने की योजना भी शुरू की जा सकती है।
नहीं हो पाएगी गैस की चोरी
बेंगलूरू स्थित एलपीजीए इक्यूपमेंट रिसर्च सेंटर (एलईआरसी) की अभिशंसा पर लागू टेम्पर प्रूफ सील में खास तरीके के प्लास्टिक का उपयोग किया गया है। सील पर विशेष प्रकार के होलोग्राम की पट्टी लगाई गई है, जो सिलेंडर के पूरे नोजल को कवर करती है। यह एक बार सिलेंडर पर लग गई तो पूरी तरह फिट हो जाती है। अगर सील खोलने की कोशिश की तो सील टूट जाएगी, जो वापस नहीं लगाई जा सकती। ऐसे में गैस चोरी होगी तो उपभोक्ता को टूटी सील से पता चल जाएगा।
निकालने पर चटक जाएकी नई सील
नए सिलेंडर की सील निकालने पर चटक जाएगी और दोबारा नहीं लगेगी। अभी पुरानी सील की प्लॉस्टिक इतनी पतली व नरम होती है, जिस पर गरम पानी डालने पर फैल जाती है और इसे निकालकर कंपनी के कर्मचारी सिलेंडर में भरी गैस चोरी कर लेते हैं और सील फिर से लगा देते हैं। इससे उपभोक्ता को पता नहीं लग पाता है कि सिलेंडर से गैस निकाली गई है या नहीं।
दिसंबर तक आ सकते हैं सिलेंडर
एचपी कंपनी के साथ करार कर इस तरह के सिलेंडर बनाए जा रहे हैं। पायलट प्रोजेक्ट तैयार कर कुछ जिलों में सप्लाई की गई है। फिलहाल यह टेस्टिंग मोड पर है। संभवतः दिसंबर 2018 तक भोपाल में नए सुरक्षित सिलेंडर आ सकते हैं। – आरके गुप्ता, अध्यक्ष भोपाल गैस डीलर्स एसोसिएशन
एचपी कंपनी बना रही है
फिलहाल एचपी कंपनी इस तरह के सिलेंडर बना रही है। प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना के तहत यह सिलेंडर बांटे जा सकते हैं। – ज्योतिशाह नरवरिया, जिला खाद्य अधिकारी भोपाल

