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त्यौहार की रौनक पर मंहगाई का असर

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जबलपुर, । महंगाई का असर त्यौहारों की रौनक को फीका कर रहा है। दीपावली की मिठाई की मिठास, आतिशबाजी की रंगीनियां, धनतेरस की खरीदी पर बढ़ती मंहगाई का असर साफ नजर आ रहा है। घर का रंग-रोगन, यहां तक कि साधारण चूने की पुताई करवाने की हिम्मत भी मध्यम वर्गीय परिवार नहीं जुटा पाया। इस वर्ष ५० फीसदी से अधिक मकानों की सफाई पुताई नहीं हो सकी। निम्न और मध्यम वर्गीय परिवार दीपावली जैसे खुशनुमा त्यौहार की खरीददारी में कटौती करने के लिये विवश हैं।
झिलमिलाते दीयों की संख्या भी कम होगी और फटाखों की खरीदी बच्चों का दिल बहालाने तक सीमित होगी। कुल मिलाकर दीपावली पर होने वाली खरीदी पर भारी कटौती होती नजर आ रही है। त्यौहार अब गरीबों की पहुंच से दूर होता जा रहा है। ऊंची कीमतों ने दीपावली की खुशियों को अपने आगोश में समेट लिया है। निम्न और मध्यम वर्गीय परिवार बीते वर्षों में दीपावली पर अच्छी खासी खरीददारी कर लेते थे। खरीदी का यह औसत ४ से ५ हजार रुपये तक पहुंच जाता था लेकिन इस बार इसके आधे पर ही सीमित होने के आसार बन गये हैं। सर्वे बता रहे हैं कि त्योहारों पर खर्च कटौती के मामले में दिल्ली सबसे ऊपर है, इसके बाद क्रमश: मुंबई, अहमदाबाद, कोलकाता और चंडीगढ़ का नंबर आता है। मध्यप्रदेश में स्थिति बहुत दयनीय है। मंहगाई में यह तेजी फल और सब्जियों के दामों में बढ़ने की वजह से है। तीन-चौथाई लोग मान रहे हैं कि वे सिर्फ जरुरी वस्तुओं को ही खरीद रहे हैं। इससे थोड़े कम लोग दीपावली पर सीमित उपहार और मिठाई खरीद रहे हैं। लोगों का कहना है कि उनका महीने का रसोई खर्च बढ़कर साढ़े चार हजार रुपये तक पहुंच गया है, जो बीते कई सालों से यह दो हजार रुपये तक था। पूजा के लिये सोने-चांदी का कुछ समान उपहार स्वरुप खरीद लिया जाता था, जो अब मध्य एवं निम्न वर्गीय परिवार के लिये महज कल्पना जैसी बात हो गई है।

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