डेंगू में सिर्फ प्लेटलेट ही नहीं, शरीर में पानी की कमी और ब्लीडिंग जैसे लक्षणों पर रखें नज़र
नई दिल्ली: डेंगू का नाम आते ही मरीजों और उनके परिजनों में सबसे पहली चिंता प्लेटलेट काउंट (Platelet Count) को लेकर होने लगती है। लैब रिपोर्ट में प्लेटलेट्स 1.5 लाख से नीचे गिरते ही लोग घबराने लगते हैं, लेकिन स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि सिर्फ प्लेटलेट काउंट के आंकड़े से यह तय नहीं किया जा सकता कि बीमारी कितनी गंभीर है। मरीज की वास्तविक स्थिति का आकलन शरीर में पानी की कमी, ब्लीडिंग और अन्य शारीरिक लक्षणों के आधार पर किया जाता है।
डेंगू में क्यों कम होते हैं प्लेटलेट्स?
आकाश हेल्थकेयर (द्वारका) के सीनियर डायरेक्टर डॉ. विक्रम जीत सिंह के अनुसार, प्लेटलेट्स कम होने के पीछे मुख्य कारण हैं:
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बोन मैरो पर असर: डेंगू का वायरस हड्डियों के अंदर मौजूद बोन मैरो (जहां प्लेटलेट्स बनते हैं) को प्रभावित करता है, जिससे इनका उत्पादन धीमा हो जाता है।
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प्रतिरक्षा प्रणाली (Immune System): संक्रमण के दौरान शरीर का इम्यून सिस्टम अत्यधिक सक्रिय हो जाता है, जिससे प्लेटलेट्स तेजी से नष्ट होने लगते हैं।
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रक्त नलिकाओं में सूजन: छोटी रक्त नलिकाओं (Blood Vessels) में सूजन के कारण भी प्लेटलेट्स की खपत बढ़ जाती है।
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समय: आमतौर पर बीमारी के तीसरे से आठवें दिन के बीच प्लेटलेट्स गिरते हैं।
40 हजार प्लेटलेट होने पर क्या खतरा है?
प्लेटलेट्स का 1.5 लाख से नीचे जाना ‘थ्रोम्बोसाइटोपेनिया’ (Thrombocytopenia) कहलाता है। यदि काउंट 40,000 तक भी गिर जाता है, तब भी केवल इस आंकड़े को देखकर डरने की जरूरत नहीं है। यदि मरीज को ब्लीडिंग नहीं हो रही है, ब्लड प्रेशर सामान्य है और वह सही मात्रा में तरल पदार्थ ले पा रहा है, तो स्थिति नियंत्रण में मानी जाती है।
इन खतरे के लक्षणों (Warning Signs) पर तुरंत ध्यान दें:
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मसूड़ों, नाक, उल्टी या मल में खून आना।
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पेट में तेज दर्द और लगातार उल्टी होना।
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अत्यधिक कमजोरी, बेचैनी या सांस लेने में तकलीफ।
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पेशाब की मात्रा में कमी होना।
बचाव और इलाज: किन बातों का रखें ध्यान?
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पर्याप्त तरल पदार्थ (Hydration): डेंगू में सबसे महत्वपूर्ण शरीर में पानी की कमी (Dehydration) न होने देना है। मरीज को पर्याप्त मात्रा में पानी और ओआरएस (ORS) जैसे तरल पदार्थ दें। उल्टी होने की स्थिति में अस्पताल में आईवी फ्लुइड्स (IV Fluids) चढ़ाने पड़ सकते हैं।
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दवाओं का सही चयन: बुखार के लिए केवल पैरासिटामोल लें। बिना डॉक्टरी सलाह के एस्पिरिन या आइबुप्रोफेन जैसी दर्द निवारक दवाएं न लें, क्योंकि इनसे ब्लीडिंग का खतरा बढ़ जाता है।
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पपीते के पत्ते का रस: पपीते के पत्ते के जूस से प्लेटलेट बढ़ाने के प्रमाण कुछ अध्ययनों में मिले हैं, लेकिन यह मानक या प्रमाणित इलाज नहीं है। इससे कुछ मरीजों में उल्टी हो सकती है, जिससे पानी की कमी बढ़ सकती है।
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प्लेटलेट ट्रांसफ्यूजन: केवल प्लेटलेट कम होने पर प्लेटलेट चढ़ाना जरूरी नहीं होता। ब्लीडिंग न होने की स्थिति में डॉक्टर मरीज की ओवरऑल मेडिकल कंडीशन देखकर ही ट्रांसफ्यूजन का निर्णय लेते हैं।

