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झारखंड विधानसभा चुनाव : JDU को मिला नया चुनाव चिह्न ‘ट्रैक्टर पर बैठा किसान’

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वेब डेस्‍क। झारखंड विधानसभा चुनाव के लिए जेडीयू को मिला नया चुनाव चिह्न ‘ट्रैक्टर पर बैठा किसान’
चुनाव आयोग ने झारखंड विधानसभा चुनाव के लिए जेडीयू को ‘ट्रैक्टर पर बैठा किसान’ का चुनाव चिह्न दिया है. जेएमएम की आपत्ति पर झारखंड में जेडीयू का चुनाव चिह्न ‘तीर’ को आयोग ने फ्रिज कर दिया था।

झारखंड विधानसभा चुनाव के लिए जेडीयू को मिला नया चुनाव चिह्न ‘ट्रैक्टर पर बैठा किसान’ झारखंड विधानसभा चुनाव के लिए जेडीयू को मिला नया चुनाव चिह्न ‘ट्रैक्टर पर बैठा किसान’

रांची. झारखंड विधानसभा चुनाव के लिए जेडीयू को नया चुनाव चिह्न मिल गया है. चुनाव आयोग ने जेडीयू को ‘ट्रैक्टर पर बैठा किसान’ का चुनाव चिह्न दिया है. जेएमएम की आपत्ति पर झारखंड में जेडीयू का चुनाव चिह्न ‘तीर’ को चुनाव आयोग ने फ्रिज कर दिया था. जेडीयू ने लोकसभा चुनाव में जेएमएम के चुनाव चिह्न ‘तीर-धनुष’ को चुनाव आयोग में आपत्ति दर्ज कराकर बिहार में फ्रिज करा दिया था.

दरअसल चुनाव आयोग ने झारखंड में जेडीयू को ‘तीर’ चुनाव चिह्न इसलिए आवंटित नहीं किया, क्योंकि इससे मिलता-जुलता चुनाव चिह्न झारखंड़ मुक्ति मोर्चा (जेएमएम) के पास है. आयोग ने पिछले दिनों जारी अपने आदेश में कहा था कि जेडीयू बिहार और अरुणाचल प्रदेश में मान्यता प्राप्त राजनैतिक दल है और उसका चुनाव चिह्न तीर है, जो रिजर्व हैं. जबकि जेएमएम झारखंड में मान्यता प्राप्त राजनैतिक दल है और उसका चुनाव चिह्न ‘तीर और धनुष’ है, वह भी रिजर्व है.

जेएमएम की दलील थी कि 81 सदस्यीय विधानसभा में उसके 19 विधायक हैं और वह मुख्य विपक्षी दल है. पार्टी का गठन 1977 में हुआ था और 1985 में ‘तीर और धनुष’ चुनाव चिह्न उसे आवंटित हुआ था. झारखंड में जेडीयू का न तो कोई विधायक है और न ही कोई सांसद. इतना ही नहीं 2019 के आमचुनाव में जेडीयू ने अपना उम्मीदवार भी खड़ा नहीं किया था.

इससे पहले लोकसभा चुनाव के दौरान जेडीयू ने भी आयोग से कहा था कि बिहार में जेएमएम को ‘तीर और धनुष’ चुनाव चिह्न आवंटित न किया जाये, क्योंकि उसका चुनाव चिह्न ‘तीर’ है जो ‘तीर और धनुष’ से मिलता-जुलता है. जिसके बाद आयोग ने यह तय किया था कि जेडीयू को झारखंड और महाराष्ट्र में ‘तीर’ का चुनाव चिह्न आवंटित नहीं किया जायेगा. जबकि जेएमएम और शिवसेना को बिहार में ‘तीर और धनुष’ का चुनाव चिह्न आवंटित नहीं होगा.

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