जैव-चिकित्सा अपशिष्ट प्रबंधन पर कार्यशाला आयोजित,इम्तियाज अली ने बताया—“कचरा समस्या नहीं, राजस्व और रोजगार का साधन है”
जैव-चिकित्सा अपशिष्ट प्रबंधन पर कार्यशाला आयोजित,इम्तियाज अली ने बताया—“कचरा समस्या नहीं, राजस्व और रोजगार का साधन है
कटनी। अंतरराष्ट्रीय उच्छिष्ट प्रबंधन संस्थान (IIWM) एवं मध्यप्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड, कटनी के संयुक्त तत्वावधान में जैव-चिकित्सा अपशिष्ट प्रबंधन नियम, 2016 एवं उसके संशोधनों पर एक दिवसीय कार्यशाला का आयोजन एकता हेरिटेज, टीजीएस होटल, कटनी में किया गया। कार्यशाला का उद्देश्य स्वास्थ्य संस्थानों एवं संबंधित हितधारकों को जैव-चिकित्सा अपशिष्ट के वैज्ञानिक प्रबंधन, नियमों की जानकारी, क्षमता वर्धन तथा आधुनिक तकनीकी समाधानों से परिचित कराना था।
कार्यक्रम का शुभारंभ दीप प्रज्ज्वलन एवं अतिथियों के स्वागत के साथ हुआ। उद्घाटन सत्र में मुख्य अतिथि श्रीमती प्रीति संजीव सूरी, महापौर, नगर निगम कटनी, डॉ. राज सिंह, मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी, डॉ. यशवंत वर्मा, सिविल सर्जन, जिला अस्पताल तथा डॉ. राजेंद्र गुप्ता, अध्यक्ष, नर्सिंग एसोसिएशन ने जैव-चिकित्सा अपशिष्ट के सुरक्षित एवं वैज्ञानिक प्रबंधन में स्वास्थ्य संस्थानों की भूमिका और प्रमुख चुनौतियों पर विचार व्यक्त किए।
कार्यशाला में अस्पतालों, क्लीनिकों, प्रयोगशालाओं एवं औषधीय क्षेत्र से जुड़े 50 से अधिक प्रतिभागियों ने भाग लिया। विशेषज्ञों द्वारा जैव-चिकित्सा एवं अस्पताल अपशिष्ट प्रबंधन के विभिन्न पहलुओं पर व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया गया।
श्री वी. के. अहिरवार, पूर्व निदेशक, एमपीपीसीबी ने जैव-चिकित्सा अपशिष्ट प्रबंधन नियमों के कानूनी ढांचे एवं अनुपालन संबंधी प्रावधानों की जानकारी दी। डॉ. एम. एल. पटेल, निदेशक, IIWM ने संस्थान की भूमिका तथा जैव-चिकित्सा अपशिष्ट प्रबंधन नियम, 2016 एवं उसके संशोधनों पर विस्तार से चर्चा की। डॉ. एन. पी. शुक्ला, पूर्व अध्यक्ष, एमपीपीसीबी ने जैव-चिकित्सा अपशिष्ट से जुड़े खतरों एवं कुछ महत्वपूर्ण मामलों के माध्यम से सुरक्षित प्रबंधन की आवश्यकता को रेखांकित किया। श्री सैयद फरीद उद्दीन ने अपशिष्ट के वर्गीकरण, पृथक्करण, संग्रहण, पैकेजिंग, लेबलिंग, भंडारण एवं परिवहन की वैज्ञानिक प्रक्रिया समझाई।
भोपाल मॉडल से अस्पतालों में कचरे को आय के अवसर में बदलने पर जोर
कार्यशाला में श्री इम्तियाज अली, प्रोजेक्ट डायरेक्टर, सार्थक संस्था ने अपने लंबे अनुभव के आधार पर “भोपाल मॉडल” के माध्यम से अस्पतालों में Zero Waste एवं Waste-to-Revenue की अवधारणा प्रस्तुत की। उन्होंने कहा कि आज कचरे को केवल निपटाने की समस्या के रूप में देखने की आवश्यकता नहीं है, बल्कि सही पृथक्करण, वैज्ञानिक प्रबंधन, डिजिटल ट्रेसेबिलिटी और पुनर्चक्रण के माध्यम से इसे राजस्व, रोजगार और संसाधन में बदला जा सकता है।
उन्होंने अस्पतालों के लिए स्मार्ट मॉनिटरिंग, डिजिटल एविडेंस, ट्रेसेबिलिटी, स्रोत पर पृथक्करण तथा डेटा आधारित अपशिष्ट प्रबंधन को आवश्यक बताते हुए कहा कि इससे न केवल नियमों का बेहतर अनुपालन सुनिश्चित होगा, बल्कि अस्पतालों के अपशिष्ट प्रबंधन की पूरी प्रक्रिया को पारदर्शी और जवाबदेह बनाया जा सकता है।
इम्तियाज अली ने कहा कि “भोपाल मॉडल की मूल सोच है—कचरा समस्या नहीं, संसाधन है; कचरा बोझ नहीं, राजस्व और रोजगार का अवसर है।” अस्पतालों में उत्पन्न विभिन्न प्रकार के अपशिष्ट का वैज्ञानिक पृथक्करण करके पुनर्चक्रण योग्य सामग्री को अर्थव्यवस्था से जोड़ा जा सकता है, जबकि जैव-चिकित्सा एवं जोखिमपूर्ण अपशिष्ट का नियमों के अनुरूप सुरक्षित उपचार एवं निपटान किया जाना चाहिए।
उन्होंने Zero Waste Hospital की दिशा में आगे बढ़ने के लिए तकनीक, प्रशिक्षण, निगरानी, दस्तावेजीकरण और आर्थिक मॉडल को एक साथ जोड़ने की आवश्यकता बताई। उन्होंने कहा कि ऐसी व्यवस्था विकसित की जा सकती है जिसमें पर्यावरण संरक्षण के साथ अस्पतालों के लिए आर्थिक बचत, अतिरिक्त राजस्व और स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर भी पैदा हों।
कार्यक्रम के अंत में प्रतिभागियों से प्रतिक्रिया एवं चर्चा की गई तथा प्रमाणपत्र वितरित किए गए। कार्यशाला ने स्वास्थ्य संस्थानों, प्रशासन, प्रदूषण नियंत्रण तंत्र और विशेषज्ञों के बीच मानक आधारित जैव-चिकित्सा अपशिष्ट प्रबंधन, Zero Waste Hospital तथा Waste-to-Revenue मॉडल पर संवाद के लिए महत्वपूर्ण मंच प्रदान किया।








