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जिला शिक्षा अधिकारी का अजीबो-गरीब फरमान,निलंबित कर्मचारियों को फोटो खींचे जाएं…

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ग्वालियर  मध्य प्रदेश के ग्वालियर (Gwalior) में जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय से निलंबित कर्मचारियों के लिए निकला एक आदेश विवादों में घिर गया. निलंबित कर्मचारियों के लिए अलग कुर्सी लगाकर उनकी तस्वीरें शिक्षा विभाग के वाट्सएप ग्रुप पर भेजने वाले इस आदेश पर बवाल मचा तो इस आदेश को वापस ले लिया गया. इतना ही नहीं ज़िला शिक्षा अधिकारी ने तो मामले के तूल पकड़ते ही पल्ला झाड़ लिया.

DEO कार्यालय से आया था ये अजीबोगरीब आदेश
ग्वालियर जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय से 22 फरवरी को एक आदेश जारी किया गया था. निलंबित कर्मचारियों को लेकर जिले के BEO और सभी सरकारी स्कूल प्राचार्यो के लिए एक आदेश जारी हुआ था. कलेक्टर के निर्देश का हवाला देते हुए इस आदेश में कहा गया था कि विभाग के निलंबित कर्मचारियों को निलंबन अवधि के दौरान मुख्यालय पर बैठना अनिवार्य होगा. मुख्यालय में निलंबित कर्मचारियों के लिए अलग से कुर्सी लगाई जाए और कुर्सी के ऊपर निलंबित कर्मचारियों के लिए आरक्षित स्थान लिखा जाए. आदेश में आगे लिखा था कि निलंबित कर्मचारियों को इन कुर्सियों पर बैठकर फोटो खींचे जाएं और फ़ोटो को शिक्षा विभाग के ग्रुप में डाला जाए. 25 फरवरी तक सभी निलंबित कर्मचारियों के फोटो और जानकारी DEO कार्यालय भेजे जाएं.

मामले ने पकड़ा तूल, DEO ने वापस लिया आदेश

ज़िला शिक्षा अधिकारी दफ्तर के अजीबोगरीब आदेश का पालन करने में बीईओ और स्कूल प्राचार्य जुट गए, फिर क्या था, निलंबित कर्मचारियों के लिए मुख्यालयों पर कुर्सियां लगने लगीं और उन पर निलंबित कर्मचारियों को बैठाकर फोटो खींचने का सिलसिला शुरु हो गया. डीईओ दफ्तर से निकले इस आदेश से निलंबित कर्मचारी खुद को शर्मिंदा महसूस कर रहे थे, तो वहीं शिक्षाविद इस आदेश को शिक्षकों का अपमान और मानवाधिकार के खिलाफ बता रहे थे. फिर इस मामले को लेकर विभागीय स्तर पर शिकायतें शुरू हुईं. चूंकि ये मामला सीधे शिक्षकों के मानव अधिकारों के खिलाफ था, जब मामले ने तूल पकड़ लिया तो DEO विकास जोशी ने इस आदेश को वापस ले लिया.

DEO ने पल्ला झाड़ा
ज़िला शिक्षा अधिकारी विकास जोशी का कहना है उनकी गैर मौजूदगी में प्रभारी ने ये आदेश निकाला था. मामले में जांच कर विभाग को पूरी रिपोर्ट भेजी जाएगी

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