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जबलपुर-गुरूगोबिंद सिंह ने देशवासियों के खोये हुए स्वाभिमान को जगाया-बादल

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जबलपुर  । ‘‘कोैमें वही तरक्की करती हैं जो अपने शहीदों का सम्मान करती हैं। भारतीय सिख दुनिया में अमेरिका, इग्लैंड सहित जहां भी गये वहां की तरक्की में अहम योगदान दिया। पंजाब से बाहर 10 गुना सिख बसते हैं। सिखों में मानवता और सत्य धर्म की रक्षा के लिये बेशुमार कुर्बानी दी हैं।’’

धूमधाम से मनाई गई गुरूगोबिंद सिंह जयंती गुरूगोबिंद सिंह ने देशवासियों के खोये हुए स्वाभिमान को जगाया-बादल

  ‘‘देह शिवा वर मोहे इहै शुभ कर मन ते कबहूं ना डरों’’  ‘‘देह शिवा वर मोहे इहै शुभ कर मन ते कबहूं ना डरों’’

 

महान गुरूगोबिंद सिंह ने देशवासियों के खोये हुये स्वाभिमान को जगाकर उनमें नवजागृति, अदम्य साहस और राष्ट्रभक्ति का जज्बा भरकर दुश्मन और आतताईयों को खुली चुनौती देकर मैदाने जंग में ऐतिहासिक जीत हांसिल कर विजय पताका फहराई।’’ तदाशय के प्रेरणास्पद और सारगर्भित उद्गार पंजाब के पूर्व उपमुख्यमंत्री सुखवीरसिंह बादल ने शिवाजी मैदान सदर में आयोजित श्रीगुरूगोबिंद सिंह जयन्ती के अवसर पर व्यक्त किये।

उन्होंने आगे कहा कि सिक्खों ने मानवता, विश्व शान्ति और राष्ट्र रक्षा हेतु सिक्ख गुरूओं से लेकर हाल के पठानकोट के शहीदों तक अनेक कुर्बानियां देकर स्वर्णिम इतिहास बनाया है। इमरजेंसी में जबलपुर जेल में बंद प्रकाशसिंह बादल को भी याद किया गया।

आजादी के बाद वे 17 वर्षो तक देश की विभिन्न जेलों में रहे। इस मौके पर केन्द्रीय मंत्री श्रीमति हरसिमरत कौर बादल, मंजीतसिंह जीके अध्यक्ष शिरोमणि गुरूद्वारा प्रबंधक कमेटी दिल्ली, मनिन्दरसिंह सिरसा विधायक दिल्ली, कुलदीपसिंह भोगल राष्ट्रीय अध्यक्ष दंगा पीडित समिति दिल्ली एवं विद्ववान गुरूवाणी मीमांसक ज्ञानी हरभजन सिंह अलवर राजस्थान ने बताया कि एन.सी.आर.टी.सी. के पुस्तकों के पाठ्यक्रम में सिख इतिहास दर्ज होगा एवं आनंद मैरिज एक्ट लागू होगा। इस मौके पर जबलपुर के समस्त गुरूद्वारों एवं पंजाबीे-सिख सभाओं ने बादल दम्पती को अभिनन्दनपत्र से सम्मानित किया और नववर्ष कैलेन्डर का विमोचन हुआ।

प्रकाशोत्सव पर   हजारों की तादात में श्रृद्धालुओं ने लम्बी कतारों में लगकर घंटों इंतजार के बाद श्रीगुरूग्रंथसाहिब के समक्ष मत्था टेककर अपनी श्रृद्धा, भक्ति, उमंग और उत्साह का इजहार किया। हर वर्ग और धर्म के जायरीनों ने एक ही पंगत में बैठकर गुरू का लंगर एक साथ ग्रहण कर सर्वधर्म सौहार्द का संदेश सार्थक कर दिया। इस मौके पर हरिमंदिरसाहिब स्वर्ण मंदिर अमृतसर के विश्वख्यात हुजूरी रागीजत्था भाई लखवीर सिंहजी ने सम-सामयिक गुरूवाणी शबद- ‘‘वह प्रगट़यो मरद अगंमणा वरयाम अकेला, वाह वाह गोविंद सिंह आपे गुरू चेला’’ प्रस्तुत कर साध संगत को रसविभोर कर दिया। उन्होंने लगातार दो घंट तक कीर्तनरस वर्षा की, उन्हें सुनने भारी जनसमुदाय उत्साह के साथ उमड़ा। रागीजत्था भाई विक्रमजीत सिंह जम्मू एवं साजिंदे साथियों ने वीररस से ओत-प्रोत शबद- ‘‘देह षिवा वर मोहे इहै शुभ कर मन ते कबहूं ना डरों, ना डरों अरू सयों जब जाए लड़ौं निष्चय कर अपनी जीत करों’’ प्रस्तुत करते हुये कहा कि हिन्दुस्तानी आन-बान-शान तथा सत्यधर्म व मानवता की खातिर अपने माता-पिता, चारों पुत्रों, कुटुम्बीजनों सहित स्वयं का महान बलिदान देकर विजयी राष्ट्रपताका फहराने वाले खालसा पंथ के सृजक तथा सिखधर्म के दसवें गुरू साहिब-ए-कमाल साहिब श्रीगुरू गोबिंद सिंहजी महाराज ने खालसा पंथ की स्थापना कर विश्व को गुरूगं्रथसाहिब के रूप में मानवता की महान धरोहर प्रदान की, जिससे समूची मानवता का पथ आलौकित हो रहा है। अपरान्ह 4 बजे मुख्यग्रंथी द्वारा सर्वत्र के भले की विशेष अरदास प्रार्थना के बाद श्रीगुरूग्रंथसाहिब का मुखवाक सम्पन्न करवाया गया। तत्पश्वात् कड़ाह प्रसाद वितरण के साथ प्रकाशोत्सव का सोल्लास समापन हुआ। कार्यक्रम का संचालन हरजीतसिंह कंग एवं आभार प्रदर्शन पूर्वमंत्री हरेन्दजीत सिंह बब्बू ने किया। आयोजन की सफलता में सदर प्रधान स. नक्षत्रसिंह, प्रभजोतसिंह, कुलवन्तसिंह, लखवीरसिंह, हरजीतसिंह सूदन, मेजर सिंह, पंडित मदन दुबे, कौमीसिंह, पलविन्दरसिंह, हरइन्दरसिंह रेखी एवं सेवादारों का विशेष योगदान रहा। गुरूपर्व के तहत आज विद्युत छटा से गुरूद्वारों को रोशन किया गया व सिख धर्मावालम्बियों द्वारा घरों में दीप प्रज्जवलित किये गये। प्रकाश पर्व पर गुरूद्वारा सदर में श्रीगुरूग्रंथसाहिबजी के श्रृंखलाबद्ध अखंडपाठ सम्पन्न हुए तथा विभिन्न गुरूद्वारों से पर्व की भोरबेला में संकीर्तन प्रभात फेरियां निकाली गई। प्रकाश पर्व के मौके पर सभा द्वारा समाजसेवी, जनप्रतिनिधियों एवं सेवादारों को सिरोपा भेंट कर सम्मानित किया गया।

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