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जबलपुर- अगले चरण में बनेंगी 114 धनुष तोपें

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जबलपुर।  नगर के सुरक्षा संस्थान जीसीएफ में बनने वाली धनुष अपने अंतिम परीक्षण के दौरान भी सफल सफल साबित हुई ।विगत 7 जून को पोखरण में हुए अंतिम परीक्षण में सभी6तोपों केद्वारा सफलतापूर्वक फायरिंग की गई ।ट्रायल के अंतिम चरण में 5 दिनों में 300 से अधिक फायर किए गए प्रत्येक तोप द्वारा 50 रन से अधिक फायर किए गए ।

अधिकृत पुष्टि ,धनुष तोप अंतिम परीक्षण में भी सफल

7 जून को सभी तोपों से एक साथ 100 से अधिक राउंड फायर किए गये। ट्रायल हेतु नालंदा के बीएमसी का उपयोग किया गया। इसके अतिरिक्त दक्षिण अफ्रीका के बी एम सी का भी उपयोग किया गया ।उक्त जानकारी और अधिकृत घोषणा जीसीएफ के वरिष्ठ महाप्रबंधक एसके सिंह ने पत्र वार्ता के दौरान की। उन्होंने कहा कि यह शहर के लिए गर्व की बात तो है ही ।

देश के लिए भी गर्व की बात है कि समय के पूर्व धनुष तोप का सफल परीक्षण हुआ। किसी भी परियोजना को विकसित करने के लिए 15 वर्ष का समय लगता है लेकिन धनुष तोप को विकसित करने में मात्र 7 वर्ष का समय लगा ।इस दौरान धनुष के मजल और बेरल में कुछ खराबी आई थी ।लेकिन उसे विशेषज्ञों की मदद से दूर कर लिया गया ।

उन्होंने आगे बताया कि धनुष तोप मे अनेक खूबियां हैं। धनुष जहां अन्य तोपों से हल्की है ।वही अन्य तोप के मुकाबले इसकी गति भी ज्यादा है ।जहां दूसरी तोप किसी स्थान को तय करने में 5 मिनट लेतीहैं ।वहां धनुष तोप उतनी ही दूरीको 3 मिनट में तय कर लेती है। बताया गया कि धनुष तोप की कीमत अन्य तोपों की कीमतों के मुकाबले कम है। धनुष तोप प्रारंभ से ही एक महत्वाकांक्षी परियोजना के तहत बनाई जा रही थी ।जिसे हम ने सफलतापूर्वक उस उस लक्ष्य को प्राप्त कर लिया है ।

अब यह धनुष तोप सेना का गौरव बढ़ाएगी और देश की रक्षा में सहायक होगी। अगले चरण में जी सी एफ मे 114 धनुष को तोपें और बनाई जाएंगी। धनुष तोप मूलतः बोफोर्स तोप का विकसित रूप है ।जिसमें 80फीसदीस्वदेशी पुर्जे लगाए गए है। साल 2019 तक इसमें स्वदेशी पुर्जे लगभग 91 फ़ीसदी होंगे। धनुष की मारक क्षमता भी बढ़ाई गई है बोफोर्स जहां 28 किलोमीटर तक मार करती है वही धनुष तोप 38 किलोमीटर तक मार करती है। इसमें उन्नत इलेक्ट्रॉनिक सिस्टम भी लगाया गया है।

उन्होंने आगे बताया कि डिफेंस एक्यूजिशन काउंसिल द्वारा अक्टूबर 2011 में लिए गए महत्वपूर्ण निर्णय में 155 कैलीवर की भारतीय तोप का धनुष के नाम से प्रोजेक्ट जीसीएफ को प्राप्त हुआ था ।जिसमें अन्य आयुध निर्माणियां, पीएसयू और कुछ निजी कंपनियों की मदद से इसे स्थापित किया गया । सन 2014 में धनुष का प्रोटोटाइप बनकर तैयार हो गया था ।

अभी तक 12 प्रोटोटाइप में बनाए जा चुके हैं।धनुष तोप के निर्माण से अब व्हीकल फैक्ट्री और जी आई एफ मे भी संभावनाओं के द्वार खुलेंगे।
आगे उन्होंने बताया कि जी सी एफ मे परंपरागत रूप से बनने वाली एल एफ जी का काम भी अगले तीन वर्ष तक जारी रहेगा।पत्र वार्ता के दौरान अपर महाप्रबंधक द्वय संजय पटनायक एवं आर के पांडे तथा अनुपम सोनी भी उपस्थित थे।

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