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जज्‍बा-कभी चलाती थी डबल डेकर बस और आज है ‘रिंग की रानी’, जानें सपने को सच करने की कहानी

पटियाला। कहते हैं बड़े सपने देखो और लगन व जज्‍बा हो तो हर सपना पूरा होता है। मेहनत और कुछ कर गुजरने की इच्‍छा शक्ति व्‍यक्ति को उसकी मनचाही मंजिल तक जरूर ले जाती है। ऐसा ही कुछ कर दिखाया है पेशे से बस चलाने वाली संगीता ने। संगीता ब्रिटेन में डबल डेकर बस चलाती थी। लेकिन, उसके दिल में कुछ बड़ा करने और ऊंचा मुकाम बनाने की चाहत थी। इसी ख्‍वाहिश ने उसे बॉक्सिंग की दुनिया का सितारा बना दिया।

संगीता ब्रिटेन में बस चलाती थी। वर्ष 2013 में उनके मन में बॉक्‍सर बनने की इच्‍छा जगी। उस समय 25 साल की हो चुकी संगीता प्रोफेशनल बॉक्सर बननना चाहती थी, लेकिन न तो उसे बॉक्सिंग के बारे में अधिक कुछ पता था और न ही उसके पास संसाधन थे। संसाधन न होने से उसने बॉक्सिंग सीखने में खुद को असमर्थ महसूस किया। इसी दौरान उसकी दोस्‍ती एक बॉक्‍सर संजीत से हुई। संगीता ने अपनी बॉक्‍सर बनने की ख्वाहिश संजीत को बताई।

बॉक्सर दोस्त ने पटियाला की संस्था के बारे में बताया तो मिली मंजिल

इसके बाद क्‍या था, बस उसके लिए रास्‍ते निकलते चले गए। संजीत ने संगीता का संपर्क पटियाला के बॉक्सिंग क्लब किंग्स ऑफ रिंग्स से करवाया। क्लब ने संगीता के सपनों में रंग भरने के लिए उन्हें बॉक्सिंग का प्रशिक्षण दिलाने की व्यवस्था कराई। संगीता ने इसके बाद बाॅक्सिंग के गुर सीखने में जुट गई। उसने पूरी लगन के साथ बॉक्सिंग सीखी।

इसके बाद संगीता कस बॉक्सिंग का सफर शुरू हो गया और उसने दोबारा पीछे मुड़कर नहीं देखा। इन दिनों संगीता प्रोफेशनल बॉक्सर हैं और महिला वर्ग में कई चैंपियनशिप जीत चुकी हैं। संगीता का परिवार मूल रूप से जालंधर के लंबा पिंड का है। उनका जन्म कनाडा के ब्रैम्पटन में हुआ है। उनका परिवार 20 साल पहले इंग्लैंड शिफ्ट हो गया था। इससे पहले परिवार कनाडा में रहता था।

ब्रिटिश बॉक्सर आमिर खान को देख बॉक्सर बनने की तमन्ना जागी

संगीता यूके के सलॉओ शहर में डबल डेकर बस की ड्राइवर हैं। वर्ष 2013 में वह यूएस गई थीं। इसी दौरान उन्‍होंने ब्रिटिश बॉक्सर आमिर खान की फाइट देखी, जिससे वह प्रभावित हुईं और उनके मन में बॉक्सर बनने की इच्छा जगी। संगीता ने बताया कि बॉक्सर बनने के लिए वहां उन्हें कई चुनौतियों का सामना करना पड़ा। इसके तहत उन्हें ट्रेनिंग करने के रिंग, गाइडेंस और फाइट के लिए प्रतिद्वंद्वी ना मिलना मुख्य रूप से शामिल था। इसके लिए किंग्स ऑफ रिंग्स संस्था उनकी सहायता के लिए आगे आई। संस्था ने जहां उन्हें रफ-टफ बनाने के लिए सख्त ट्रेनिंग की व्यवस्था की। कोच अनूपदीप और इरफान मलिक ने उनके टैलेंट को ऐसा निखारा कि कई टाइटल उन्होंने अपने नाम कर लिए।


15 बार लंदन और 1-1 बार यूके व यूरोपियन चैंपियनिशप जीत चुकी हैं संगीता

किंग्स ऑफ रिंग्स संस्था से ट्रेनिंग लेकर संगीता ब्रो-प्रो लीग के महिला वर्ग मुकाबलों में 15 बार लंदन, एक बार यूके और एक बार यूरोपियन टाइटल जीत चुकी हैं। संगीता ने बताया कि यह प्रशिक्षकों की गाइडेंस के बिना संभव नहीं था। आज मैं जो भी हूं, सही गाइडेंस की वजह से ही। मैं हर साल काम से समय निकाल कर पटियाला (पंजाब) आती हूं। इस अवधि में अपने खेल को और निखारने का प्रयास करती हूं।


150 बॉक्सरों को प्लेटफार्म मुहैया करवा चुकी है किंग्स ऑफ रिंग्स संस्था

किंग्स ऑफ रिंग्स के सदस्य परम ने बताया कि संस्था अब तक 150 के करीब बॉक्सरों को प्लेटफॉर्म मुहैया करवा चुकी है। दूसरे देशों से आने वाले बॉक्सरों के लिए बाॅक्सिंग रिंग और कोच की व्यवस्था करवाई जाती है, ताकि वे अपने सपने पूरे कर सकें। भारत का जलवायु भी पश्चिमी देशों के मुकाबले गर्म है। बॉक्सर खुद को गर्मी में स्ट्रॉंग बनाने के लिए भारत में प्रैक्टिस करने को वरीयता देते हैं। संस्था आर्थिक रूप से कमजोर बॉक्सरों की सहायता करती है।


खिलाडियों को एक अच्छा मंच प्रदान करने का आइडिया दोस्तों से शेयर कर शुरू की संस्था

संस्था के संस्थापक कोच अनुदीप हैं। उन्होंने आठ साल पहले संस्था का गठन किया था। अनुदीप सिंह का बाॅक्सिंग जगत में जाना-पहचाना नाम है। उन पर बाॅलीवुड फिल्म मुक्केबाज भी बन चुकी है। अनुदीप ने सोचा कि क्यों न बाॅक्सिंग में ऐसे खिलाडियों की सहायता की जाए, जिनके पास संसाधनों की कमी है। यह आइडिया उन्होंने अपने दोस्त संतोष दत्ता, बाॅक्सर परम, प्रिंसिपल तोता सिंह और बाॅक्सर संजीत गिल से साझा किया और संस्था गठित कर दी। संस्था द्वारा सुबह 6 से 8 बजे और शाम 5 से 8 बजे तक खिलाडियों का ट्रेनिंग सेशन करवाया जाता है। संस्था अब बाॅक्सिंग के अलावा दूसरे खेलों के होनहार खिलाडियों को भी प्लेटफार्म उपलब्ध करवाने के लिए कदम उठाने जा रही है।

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