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चुनावों की उल्टी गिनती हुई शुरू, कांग्रेस में अभी भी नियुक्तियों का इंतजार

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जबलपुर, नगर प्रतिनिधि। एक तरफ जहां भारतीय जनता पार्टी की सरकार तीन कार्यकाल पूरे करने कें बाद भी पूरी ताकत से चौथी बार सरकार बनाने की तैयारी में है वहीं दूसरी तरफ कांग्रेस अपना संगठन ही नहीं बना पा रही है। भाजपा जहां बूथ लेविल तक पहुंच चुकी है

वहीं दूसरी तरफ कांग्रेस के हाल यह हैं कि उसके प्रदेश अध्यक्ष को ही यह पता नहीं है कि वह कल रहेगा या नहीं। पिछले तीन सालों से परिवर्तन का लालीपॉप पकड़ा कर कार्यकर्ताओं से इंतजार करने को कहा जा रहा है लेकिन इंतजार है कि खत्म होता ही नहीं।
ठंडा पड़ गया माहौल
पिछले महीने घमासान के बाद सघन चुनावों की प्रक्रिया शुरू हुई थी। पर्यवेक्षक शहर में घूमें मंडल से लेकर नगर व ग्रामीण अध्यक्ष पद क दावेदारों ने जमकर शक्ति प्रदर्शन किया। उम्मीद जगी थी कि अब परिवर्तन होगा लेकिन पर्यवेक्षकों के भोपाल जाते ही फाईलों पर फिर से धूल जम गई। अब कहते हैं पहले युवराज की ताजपोशी होगी फिर छोटी स्तर पर।
4 साल से इस्तीफा लिए घूम रहे
कांग्रेस संगठन के हालात यह है कि नगर अध्यक्ष दिनेश यादव पिदले चार सालों से इस्तीफा लिए घूम रहे हैं लेकिन कोई लेने तैयार नहीं हैं। विधानसीाा चुनावों में हुई करारी हार की नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए उन्होंने इस्तीफा देने की पहल की थी लेकिन पार्टी ने नई नियुक्ति तक काम करने को कहा। वे चार साल से नई नियुक्ति का इंतजार ही कर रहे हैं। वहीं ग्रामीण अध्यक्ष जैसे हैं वेसे नहीं भी हैं। दिनेश तो कम से कम पार्टी के कार्यक्रमों में शोभा की सुपाड़ी बन जाते हैं। राधेश्याम को तो ज्यादातर कार्यकर्ता अध्यक्ष ही नहीं मानते।
खुद ही आ गए मैदान में
कांग्रेस नेता खासतौर पर विधान सभा चुनावों में टिकट के दावेदार माने जाने वाले चेहरे इंतजार करते करते अब खुद ही मैदान में अउ गए हैं। बरगी में तो पहले ही जितेन्द्र अवस्थी व संजय यादव सक्रिय हो गए थे। अब पूर्व से भी लखन और केंट से आलोक मिश्रा ने यात्राओं के माध्यम से क्षेत्र में चुनावी घमासान छेड़ दिया है। इसके अलावा पाटन विधायक तो पिछले दो साल से चुनावी मूड में हैं। वहीं मध्य भी धीरे धीरे सुलगने लगा है। इतने सब पर भी संगठन हासिए पर है। मैदानी कार्यकर्ता विपक्ष की भूमिका से थक चुका है लेकिन शीर्ष नेतृत्व अभी भी सुस्त पड़ा है।

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