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चुनावी सरगर्मियों के बीच, झण्डे-बैनर के व्यापारी भी तैयार

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जबलपुर, प्रतिनिधि । चुनाव की घोषणा के साथ ही शहर में राजनैतिक सरगर्मिया तेज हो गयी हैं मौका पांच साल में एक बार आता है इसलिए व्यापारी भी लाभ कमाने कमर कस चुके है। इनमें झण्डे ,बैनर,और प्रिटिंग के व्यापारी शामिल है इन्हें बस इंतजार है प्रत्याशियों की घोषणा का जिसके बाद उनका व्यापार पूरे शबाब पर आ जाएगा। कांग्रेस भाजपा पर ज्यादा जोर- व्यापारियों का कहना है कि शहर में ज्यादातर देश की दो प्रमुख पार्टियों का जोर रहता है लिहाजा इन पार्टियों के बैनर, पोस्टरों की मांग ज्यादा है। इन्होने भी ज्यादातर सामग्रिया इन्ही पार्टियों की मंगा रखी है।
बस टिकट की घोषणा का इंतजार
टिकिट घोषणा का जितना बेसब्री से इंतजार नेताओं को है उतना ही चुनाव सामग्रियां बेचने वालों को है इनका मानना है कि जैसे ही सभी पार्टियों के प्रत्याशियों की टिकिट की घोषणा होती है उनका व्यापार तेज गति से दौड़ पड़ेगा जिसको लेकर वे अपनी सारी तैयारियां पूर्व मे ही कर चुके है ।
मोदी और राहुल मुखौटों की मांग रहेगी ज्यादा
चुनाव सामग्रियां बेच रहे लोगों का कहना है कि इस बार चुनाव भले ही विधानसभा को हो रहा हो लेकिन पूरे चुनाव में राष्ट्रीय मुद्दे हावी रहेेगें और इस विधानसभा चुनाव में मोदी और राहुल गांधी मुख्य केन्द्र रहेगें इसलिए प्रचार के लिए इनके मुखौटों का भी जमकर इस्तेमाल होगा।
पहले से अगर बनवाई प्रचार सामग्री तो खर्चो में जुड़ेगी
विधानसभा चुनाव मैदान में उतरे ऐसे प्रत्याशी जिन्होंने अपनी प्रचार सामग्री नामांकन की तिथि से पहले से तैयार की हुई, उन्हें उसका खर्च भी निर्वाचन व्यय में जोडऩा होगा।
भारत निर्वाचन आयोग ने प्रत्याशियों के निर्वाचन व्ययों के लेखों के संबंध में स्पष्ट किया है कि अभ्यर्थी अपने निर्वाचन व्यय लेखों के रजिस्टर का रखरखाव करते समय उन सभी खर्च के लिए भी उत्तरदायी होगा, जो उसने पूर्व में सामग्री तैयार करने में व्यय की है तथा जिसका वास्तविक उपयोग वह नामांकन अवधि समाप्त होने पर करता है।
उल्लेखनीय है कि आयोग के ध्यान में यह लाया गया कि कुछ मामलों में नामांकन दाखिल करने से पहले ही भावी उम्मीदवार को पहले से तैयार की गई प्रचार सामग्री प्राप्त हो जाती है. इस प्रकार के खर्चों के लेखे संबंधी प्रश्न भी उठाए गये हैं. पूर्व में कुछ अभ्यर्थियों ने अपने निर्वाचन व्ययों के लेखों से उन मदों पर उपगत व्यय इस बहाने हटा दिया कि केवल नामांकन दाखिल करने के दिन उपगत व्यय के लिए ही लेखा देना होता है.

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