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चने की ग्रेडिंग में भ्रष्टाचार फर्जी कागज बनाकर काम निपटाने की तैयारी में मध्य भारत

mandi news

जबलपुर। न्यूनतम समर्थन मूल्य पर हुई चने की खरीदी में मध्य भारत कन्सोलियम द्वारा जो भ्रष्टाचार किया गया इसके लेकर तो प्रशासन का रुख जग जाहिर है। जिसमें एफआईआर होने की भी बात कही जा रही है। लेकिन इतने बड़े गोलमाल के बाद भी मध्य भारत के कन्सोलियम के अधिकारी गोलमाल व भ्रष्टाचार करने से बाज नहीं आ रहे हैं।

जानकारी के मुताबिक इन्होंने जो पैसे की साठगांठ करके घटिया चना खरीद लिया गया था जिसके चलते आखिरी में चना बेचने वाले किसानों का भुगतान नहीं हो पाया। जिसके लिए प्रशासन द्वारा मध्य भारत को चने की सफाई करने का आदेश दिया गया था जिससे किसानों को भुगतान किया जा सके। लेकिन इसमें भी फर्जी दस्तावेज तैयार करके मध्य भारत कागजों में सफाई दिखा रहा है।
यह मामला मध्य भारत को जो चने की सफाई करानी थी व शहपुरा व करारी ब्रांच में करानी थी। शहपुरा में तो साठगांठ करके कागजों पर सफाई हो गई

लेकिन करारी में ऐसा नहीं हो पाया। मध्य भारत के अधिकारियों ने पहले तो घटिया चने को सफाई के नाम पर गोदाम से बाहर निकाला और फिर दूसरे दरवाजे से तारीख बदलकर उसे अंदर रखने का प्रयास किया जिसमें उन्होंने यह दिखाने की कोशिश की कि चने को पहले साफ कराने ले जाया गया और फिर उसे पुनः भंडारित कर दिया गया। जिसमें वेयरहाउस संचालक और वेयरहाउसिंग कारपोरेशन ने साथ देने से साफ मना कर दिया। लेकिन शहपुरा में सभी की साठगांठ से ये खेल हो गया।
कब तक होगी जांच
यशभारत में समाचार प्रकाशित होने के बाद वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारियों और नेफेड के वरिष्ठ अधिकारियों ने पूरे मामले की जांच कराने की बात कही है। लेकिन अगर देखना होगा कि यह जांच कब तक और कितनी निष्पक्ष होती है। क्योंकि इसके पहले भी उड़द, मूंग व अन्य शासकीय खरीदी में मध्य भारत व उससे जुड़ा हुआ एक शख्स गंभीर आर्थिक अनियमितताएं कर चुका है जिससे शासन को करोड़ों का चूना लगा था और बहुत से किसान दो सालों से अपने भुगतान के लिए चक्कर काट रहे हैं।

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