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ग्वालियर: GRMC और JAH अस्पताल बना विवादों का अखाड़ा; डीन और अधीक्षक पर गंभीर आरोप, बाबू बोला- ‘पूर्व अधीक्षक का है षड्यंत्र’

ग्वालियर: GRMC और JAH अस्पताल बना विवादों का अखाड़ा; डीन और अधीक्षक पर गंभीर आरोप, बाबू बोला- ‘पूर्व अधीक्षक का है षड्यंत्र’

ग्वालियर। अंचल का प्रतिष्ठित और अग्रणी चिकित्सा संस्थान गजरा राजा मेडिकल कॉलेज (GRMC) और जयारोग्य अस्पताल (JAH) समूह इन दिनों इलाज से ज्यादा आरोप-प्रत्यारोप, शिकायतों और अंदरूनी खींचतान को लेकर सुर्खियों में है। हैरानी की बात यह है कि इस बार विवाद की आंच संस्थान के शीर्ष जिम्मेदारों तक ही पहुंच गई है।

महिला कर्मचारी द्वारा लगाए गए गंभीर आरोपों के बाद मामला अभी शांत भी नहीं हुआ था कि अब आरोपियों की ओर से पलटवार और ‘षड्यंत्र’ के नए दावों ने मामले को और ज्यादा तूल दे दिया है।

क्या है पूरा विवाद? (डीन सहित 3 पर लगे थे आरोप)

हाल ही में GRMC की एक महिला कर्मचारी ने संस्थान के डीन, प्रभारी अधीक्षक और एक बाबू पर कई गंभीर आरोप लगाते हुए वरिष्ठ अधिकारियों से शिकायत दर्ज कराई थी।

शिकायत सामने आने के बाद हड़कंप मच गया था और प्रशासन मामले की जांच की तैयारी ही कर रहा था कि अब इसमें नया मोड़ आ गया है।

बाबू का सनसनीखेज दावा: पूर्व अधीक्षक पर लगाया षड्यंत्र का आरोप

शिकायत के घेरे में आए बाबू ने अब खुलकर मीडिया और प्रशासन के सामने अपनी बात रखी है:

  • पूर्व अधीक्षक पर निशाना: बाबू का सीधा आरोप है कि यह पूरा मामला उन्हें और अधिकारियों को फंसाने के लिए रचा गया एक बड़ा प्रशासनिक षड्यंत्र है।

  • डॉ. गिरजा शंकर गुप्ता का नाम: बाबू ने आरोप लगाया है कि इस पूरे विवाद के पीछे सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल के पूर्व अधीक्षक डॉ. गिरजा शंकर गुप्ता का हाथ है और वही पीछे से इस पूरी पटकथा को संचालित कर रहे हैं।

डॉ. नीलिमा टंडन ने भी शिकायत की विश्वसनीयता पर उठाए सवाल

मामले में आरोपी बनाई गईं डॉ. नीलिमा टंडन ने भी महिला कर्मचारी की शिकायत की नीयत और प्रक्रिया पर सीधे सवाल खड़े कर दिए हैं। उनका कहना है कि शिकायत के पीछे की वजहें व्यक्तिगत रंजिश और प्रशासनिक वर्चस्व की लड़ाई से जुड़ी हैं, जिसकी निष्पक्ष जांच होना बेहद जरूरी है।

GRMC और JAH जैसे संभाग के सबसे बड़े शासकीय अस्पताल में चल रही इस गुटबाज़ी और खींचतान के कारण अस्पताल की व्यवस्थाएं और मरीज बुरी तरह प्रभावित हो रहे हैं। अब देखना होगा कि शासन और चिकित्सा शिक्षा विभाग इस विवाद पर क्या कड़ा रुख अपनाता है।

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