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गोला, बारूद तो लेंगे लेकिन गुणवत्ता और किफायती

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पहली बार मास्टर जनरल ऑफ ऑर्डनेंस ने सुरक्षा श्रमिक नेताओं से की चर्चा
जबलपुर, विशेष प्रतिनिधि । सेना आयुध निर्माणियों से शस्त्र और गोला बारूद तो खरीदना चाहती है, लेकिन मास्टर जनरल ऑफ आर्डनेंंस अपेक्षा करते हैं कि रक्षा संस्थानों से मिलने वाले गोला बारूद और अस्त्र-शस्त्र गुणवत्तापूर्ण और किफायती हो। उक्त आशय की विचार सैन्य अधिकारियों ने ऑल इंडिया डिफेंस एम्पलाइज फेडरेशन के नेताओं के साथ हुई बैठक में रखे। उल्लेखनीय है कि आजादी के बाद पहली बार मास्टर जनरल ऑफ आर्डनेन्स ने श्रमिक नेताओं से मुखातिब होकर चर्चा की। बता दें कि मास्टर जनरल ऑफ आर्डिनेंस सेना की वह इकाई है जो सेना की सभी जरूरत मंद वस्तुओं खानपान की सामग्री से लेकर अस्त्र-शस्त्र तक सेना को उपलब्ध कराती है। उल्लेखनीय है कि रक्षा मंत्रालय ने आयुध निर्माणियों में बनने वाले सामानों में से 275 उत्पादों को नान कोर श्रेणी में डाल दिया है। जिसके लिए सेना को खुले बाजार से सामान खरीदी की अनुमति दे दी गई है। विशेष रूप से सेना को आपूर्ति किए जाने वाले वाहन और सेना के वस्त्र यूनिफॉर्म आदि हैं। आयुध निर्माणियों में लगातार कम हो रहे काम को लेकर ऑल इंडिया डिफेंस एम्पलाइज फेडरेशन ने एम जी ओ (मास्टर जनरल आफ आर्डनेन्स)को पत्र लिखकर चर्चा करने की मांग की थी । फेडरेशन की मांग पर एमजीओ ने विगत 15 अक्टूबर 2018 को श्रमिक नेताओं को चर्चा के लिए आमंत्रित किया था। सेना मुख्यालय में हुई बैठक में ए आई डी ई एफ के अध्यक्ष एस एन पाठक महामंत्री सी श्री कुमार अतिरिक्त महासचिव बी गुहा ठाकुरता के साथ आर एस रेड्डी और आर के पाराशर ने हिस्सा लिया। जबकि मास्टर जनरल ऑफ आर्डिनेंस के लेफ्टिनेंट जनरल एस के उपाध्याय, मेजर जनरल बीवी राव एवं मेजर जनरल सान्तनु दयाल ने हिस्सा लिया । श्रमिक नेताओं के अनुसार वर्तमान में आयुध निर्माणियों में उत्पन्न संकट के लिए पर्याप्त वर्क लोड ना होना है। मांग की गई कि आयुध निर्माणियों में पर्याप्त वर्क लोड प्रदान किया जाए। सेना में जहां एक और व्हीकल फैक्ट्री को काम देने की मांग नेताओं ने की वहीं वर्तमान उत्पादन लागत में बदलाव की मांग करते हुए कहा कि सुरक्षा उत्पादन में शिक्षा स्वास्थ्य पेंशन आदि में खर्च होने वाले वाली राशि को ऊपरी व्यय के रूप में को जोड़ा जाता है। जिसको अलग किया जाए और उत्पादन के लिए अलग से बजट बनाया जाए। ताकि सामान किफायती हो इसके साथ ही श्रमिक नेताओं ने निर्बाध उत्पादन के लिए 5 वर्ष के रोल प्लान की मांग की।
एम जी ओ ने कहा कि उन्हें उपरोक्त बातों पर कोई आपत्ति नहीं है यदि रक्षा मंत्रालय लागत खर्च व्यवस्था और नीतियों में बदलाव करता है। इसी तरह सैन्य अधिकारियों ने कहा कि सरकार की नीति के तहत ई एम ई वर्कशॉप का संचालन किया जाएगा। सेना सरकार की नीति का अनुशरण करेगी। इसके लिए रक्षा मंत्रालय से विचार-विमर्श किया जा सकता है। उल्लेखनीय है कि सरकार ने ई एम ई वर्कशापों को गोको माडल के तहत चलाने का फैसला किया है।इस मौके पर ए आई डी ई एफ की ओर से तीन ज्ञापन भी सौंपे गए । सकारात्मक चर्चा के लिए श्रमिक नेताओं ने एमजीओ अधिकारियों के प्रति आभार व्यक्त किया।

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