जबलपुर, मध्यप्रदेश हाईकोर्ट में मंगलवार को जबलपुर की होटल गुलज़ार में अयाची परिवार के शादी समारोह की वजह से कोरोना फैलने के मामले की सुनवाई हुई। कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश संजय यादव व जस्टिस विजय कुमार शुक्ला की युगलपीठ ने सबूत नष्ट किये जाने के सिलसिले में राज्य शासन का जवाब नदारद रहने के रवैये को आड़े हाथ लिया। इसी के साथ 10 हजार का जुर्माना (कॉस्ट) ठोंक दिया। आगामी सुनवाई तक जवाब पेश करने के सख्त निर्देश भी दिए। एक दिसंबर को मामला फिर से सुना जाएगा।
जनहित याचिका कर्ता जबलपुर निवासी एक्टिविस्ट अखिलेश चन्द्र त्रिपाठी की ओर से अधिवक्ता पंकज दुबे ने पक्ष रखा। उन्होंने दलील दी कि राकेश अयाची नगर निगम में अपर आयुक्त के रूप में पदस्थ थे, साथ ही स्वास्थ्य आयुक्त का अतिरिक्त प्रभार भी था। उनके पास कोविड-19 पीरियड में विवाह आदि समारोहों में भीड़ नियंत्रित रखने सोच-समझ कर अनुमति देने का अधिकार था। इसके बावजूद उन्होंने 30 जून, 2020 को अपने परिवार का विवाह समारोह होटल गुलजार में आयोजित कर अनलिमिटेड मेहमान आमंत्रित किये। इससे कोरोना संक्रमण फैल गया।
मदनलाल थाने में पदस्थ टीआई भी उसी परिवार के थे लिहाजा आरोप है कि होटल के फुटेज आदि सबूत नष्ट हो गए, पर कोई कार्रवाई नहीं हुई।
नगर निगम ने स्मार्ट सिटी दफ्तर में कोरोना संक्रमण की खबर का खंडन किया सुनवाई के दौरान नगर निगम जबलपुर ने स्मार्ट सिटी ऑफिस में कोरोना संक्रमण की खबर का खंडन किया। ऐसी खबरों को फर्जी निरूपित किया।

