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किसानों के लिए जरूरी जानकारी: ज्यादा बारिश से होता है किसानों को बड़ा नुकसान, ऐसे करें बचाव

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पानी जो सबके लिए जरूरी है वहीं जब अधिक हो जाए तो जान भी ले लेता है. बारिश और बाढ़ के दौरान आमलोगों और जानवरों के साथ साथ पेड़ पौधे भी इसकी अधिकता से परेशान होते हैं. कई बार तो हजारों हजार पेड़ पौधे सूख जाते हैं. डाक्टर राजेंद्र प्रसाद केंद्रीय कृषि विश्व विद्यालय बिहार के अखिल भारतीय फल अनुसंधान परियोजना के प्रधान अन्वेशकऔर एसोसिएट डायरेक्टर रिसर्च डाक्टर एस के सिंह पेड़ों में आए बदलाव के बारे मे बताते हैं कि जल जमाव वाले क्षेत्रों में मिट्टी का तापमान जितना अधिक होगा, पौधे को उतना ही अधिक नुकसान होगा. जल जमाव वाले क्षेत्रों में फलों वाले बागों में नुकसान को कम करने के लिए, नए जल निकासी चैनलों का खोदकर निर्माण करना या पंप द्वारा जितनी जल्दी हो सके बाग़ से पानी निकल कर , बाग़ को सूखा दें. यदि मूल मिट्टी की सतह पर गाद या अन्य मलबे की एक नई परत जमा हो गई है, तो इसे हटा दें और मिट्टी की सतह को उसके मूल स्तर पर बहाल कर दें.

मिट्टी में ज्यादा नमी पहुंचाती है पौधों को नुकसान
यदि मिट्टी का क्षरण हो गया है, तो इन स्थानों को उसी प्रकार की मिट्टी से भरें जो बाग में थी . रेत, गीली घास या अन्य प्रकार की मिट्टी का उपयोग न करें जो पौधों की जड़ों के आसपास मिट्टी डालते समय आंतरिक जल निकासी गुणों या मौजूदा मिट्टी की बनावट को बदल दें. जैसे ही धुप निकले एवं मिटटी जुताई योग्य हो उसकी जुताई करे .

बागों में पेड़ की उम्र के अनुसार खाद एवं उर्वरको का प्रयोग करे , लेकिन यहाँ पर ध्यान देने योग्य बात यह है की सितम्बर के प्रथम सप्ताह के बाद आम एवं लीची के बागों में किसी भी प्रकार के खाद एवं उर्वको का प्रयोग नहीं करें , नहीं किसी प्रकार का कोई शष्य कार्य करें.

सितंबर से नवंबर तक पेड़ प्रजनन काल में होते है
यदि आपने सितम्बर के प्रथम सप्ताह के बाद खाद एवं उर्वको प्रयोग किया या किसी भी प्रकार का कोई भी कृषि कार्य किया तो आपके बाग़ में फरवरी माह के अंत में मंजर (फूल ) आने की बदले आपके बाग़ में नई- नई पत्तिया निकल आएगी जिससे आपको भारी नुकसान हो सकता है. यदि आपका पेड़ बीमार या रोगग्रस्त है और आपका उद्देश्य पेड़ को बचाना है तो बात अलग है .

डाक्टर एस के सिंह के मुताबिक वाणिज्यिक फल रोपण के लिए, बाढ़ के पानी के घटने के बाद कवकनाशी का उपयोग किया जा सकता है और यह निर्धारित किया जाता है कि फल फसलें अभी भी जीवित हैं.

जलजमाव के बाद पौधे कमजोर हो जाते हैं और बीमारियों, कीटों और अन्य पर्यावरणीय तनावों के प्रति अधिक संवेदनशील होते हैं.

फाइटोफ्थोरा जड़ सड़न के लक्षणों के लिए फलों की फसलों की जाँच करें. इस बीमारी से संक्रमित पौधों में अक्सर पीले पत्ते होते हैं जो हाशिये पर “जले हुए” दिखाई देते हैं और पतझड़ में समय से पहले मुरझा सकते हैं. दवाई का इस्तेमाल करें और पेड़ों को बचाएं

संक्रमित ऊतक पर स्वस्थ (सफेद) और संक्रमित (लाल भूरे) ऊतकों के बीच एक अलग रेखा दिखाई देती है, चूंकि यह कवक कई वर्षों तक मिट्टी में बना रह सकता है. इस रोग से बचाव के लिए रीडोमिल गोल्ड नामक फफुंदनाशक 2ग्राम/लीटर पानी में घोलकर मिट्टी को खूब अच्छी तरह से भीगा दे. एक वयस्क पेड़ के आस पास की मिट्टी को खूब अच्छी तरह से भीगाने के लिए कम से कम 30 लीटर दवा के घोल की आवश्यकता हो.

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