भोपाल। क्या नौकरी की तलाश कर रहे सवा 4 करोड़ से ज़्यादा लोग अचानक ‘गुमशुदा’ हो सकते हैं? और ये हुआ है एक साल के अंतर पर जारी हुई दो रिपोर्ट्स में. 2016 से 2017 के दौरान आई दो रिपोर्ट बताती हैं कि देश में बेरोज़गारी कम हो गई है.
सेंटर फ़ॉर मॉनीटरिंग इंडियन इकोनॉमी यानी CMIEकी रिपोर्ट बताती है कि मार्च 2016 में देश में कुल 7 करोड़ 80 लाख बेरोजगार थे. इसी संस्था की अप्रैल 2017 में यह आंकड़ा घटकर 3 करोड़ 70 लाख हो गया. सवाल यह है कि बाकी 4 करोड़ 30 लाख लोग कहां गए? इन सभी को इसी संस्था की दूसरी रिपोर्ट गायब बेरोज़गार बताती है. मगर यह संख्या देश की कुल वर्कफोर्स का एक बड़ा हिस्सा है. तो क्या सरकार इन्हें अपने लेबर फोर्स के पूल में शामिल करेगी?
नोटबंदी के बाद 4.3 करोड़ बेरोजगार हुए ‘गुमशुदा’
मार्च 2016 बताया गया था कि देश में 3 करोड़ 80 लाख लोग बेरोज़गार थे और 4 करोड़ वो थे, जिनके पास नौकरी तो नहीं थी पर वो कोई न कोई काम कर रहे थे. इसे ऐसे समझिए कि ये चार करोड़ नौकरी चाहते तो थे, पर किसी तरह छोटे मोटे अनियमित काम करके काम चला रहे थे. तब देश में बेरोज़गारी दर बढ़कर 9% तक पहुंच गई थी.
