भारतीय जनता पार्टी को मजबूत करने का जितना श्रेय पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी और लाल कृष्ण आडवाणी को जाता है उतना ही श्रेय यूपी के पूर्व मुख्यमंत्री कल्याण सिंह को भी जाता है। पार्टी में उनका योगदान कभी नहीं भुलाया जा सकता। यूपी की राजनीति में उन्हें एक ऐसी तारीख माना जाता है जिसे मिटाया जा सकना संभव नहीं है।
यह उनकी ही मेहनत और लगन थी कि भाजपा ने एक साल के अंदर ही 1991 में अपने दम पर उत्तर प्रदेश में सरकार बना ली। कल्याण सिंह उत्तर प्रदेश में भाजपा के पहले मुख्यमंत्री बने। उनके जीवन में कई ऐसे मुकाम आए जिसे लेकर वह हमेशा याद किए जाएंगे। उनके जिंदगी के कई ऐसे दिलचस्प वाकये हैं जिसे जाने बिना यूपी की राजनीति और भाजपा का सफर समझ पाना काफी मुश्किल है, पढ़ें कुछ ऐसे ही किस्से….
जनसभा के दौरान फोन मिला- ‘गिर गई आपकी सरकार’
1998 का साल था और तत्कालीन मुख्यमंत्री कल्याण सिंह अपने प्रत्याशी के पक्ष में अमरोहा में एक जनसभा को संबोधित कर रहे थे। यह वही सभा थी जिसमें उन्हें फोन आया कि उनकी सरकार गिर गई है और कांग्रेस के जगदंबिका पाल मुख्यमंत्री बन गए हैं। एक चौंकाने वाले फैसले में 21 फरवरी 1998 को यूपी के राज्यपाल रोमेश भंडारी ने कल्याण सिंह को मुख्यमंत्री पद से बर्खास्त कर दिया था। जगदंबिका पाल कल्याण सिंह के मंत्रिमंडल में मंत्री थे। गवर्नर ने जगदंबिका पाल को रात साढ़े दस बजे मुख्यमंत्री पद की शपथ दिलाई थी।
अटल बिहारी वाजपेयी ने खोला मोर्चा और पलट गई बाजी
राज्यपाल के इस फैसले के बाद तो पार्टी के कई नेताओं ने मोर्चा खोल लिया जिसमें अटल बिहारी वाजपेयी अग्रणी थे। पार्टी के सत्ता से बेदखल होने के बाद अटल बिहारी वाजपेयी आमरण अनशन पर बैठ गए। यह मामला फिर हाईकोर्ट पहुंचा जहां अदालत ने राज्यपाल के फैसले पर रोक लगा दी। फिर क्या था इसके बाद तो सारी बाजी ही पलट गई।
बहुमत साबित नहीं कर पाए जगदंबिका पाल
अदालत ने सुनवाई के दौरान राज्यपाल को ही बदलने का आदेश दे दिया। वहीं दूसरी तरफ जगदंबिका पाल विधानसभा में बहुमत साबित नहीं कर सके और उन्हें मुख्यमंत्री की कुर्सी छोड़नी पड़ी। इस तरह जगदंबिका पाल एक दिन के सीएम बने और कल्याण सिंह अटल जी की बदौलत दोबारा सत्ता पर काबिज हुए। इस पूरे घटनाक्रम के बाद से जगदंबिका पाल को ‘वन डे वंडर ऑफ इंडियन पॉलिटिक्स’ कहा जाता है।
एक नजर में कल्याण सिंह का पूरा राजनीतिक सफरनामा
– 1967 : पहली बार विधायक
– 1969 : दूसरी बार विधायक
– 1974 : तीसरी बार विधायक -आपातकाल के दौरान मीसा के अंतर्गत कारावास में 25 जून 1975 से दिसंबर-जनवरी 1977 तक
– 1977 : चौथी बार विधायक, स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री बने
– 1985 : पांचवी बार विधायक, उत्तर प्रदेश भाजपा के अध्यक्ष बने
– 1989 : छठवीं बार विधायक, नेता विधायक दल बीजेपी
– 1991 : सातवीं बार विधयाक, मुख्यमंत्री बने – 24 अगस्त से 6 दिसंबर 1992 तक
– 1993 : आठवीं बार विधायक, नेता विधायक दल, बीजेपी
– 1996 : नौवीं बार विधायक, भाजपा के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष, नेता विधायक दल एवं मुख्यमंत्री
– 2000-2001 : राष्ट्रीय अध्यक्ष, राष्ट्रीय क्रांति पार्टी
– 2004 : बुलंदशहर संसदीय क्षेत्र से भाजपा सांसद निर्वाचित
– 2009 : एटा संसदीय क्षेत्र से निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में सांसद निर्वाचित
– 2014 : राजस्थान के राज्यपाल नियुक्त
