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कर्नाटक: वोटों की गिनती शुरू, येदियुरप्पा सरकार रहेगी या जाएगी आज होगा फैसला

yeddyurappa

भाजपा के पास एक निर्दलीय समेत 105 विधायक हैं
कांग्रेस के 66 व जेडीएस के 34 विधायक हैं
बसपा का एक, एक नामित विधायक और स्पीकर भी हैं
15 सीटों पर चुनाव के बाद विधानसभा की क्षमता 222 हो जाएगी
भाजपा को बहुमत के लिए 111 विधायकों का समर्थन चाहिए होगा
भाजपा को छह सीटें जीतने पर सरकार को बहुमत हासिल हो जाएगा

वेब द्वस्क। कर्नाटक में छह दिसंबर को 15 विधानसभा सीटों पर हुए उपचुनाव के लिए आज मतगणना हो रही है। राज्य के सभी मतगणना स्थलों पर कड़ी सुरक्षा के बीच सुबह आठ बजे से मतों की गिनती शुरू हो गई है। दोपहर बाद सभी सीटों के परिणाम घोषित कर दिए जाएंगे। राज्य में अपनी सरकार बनाए रखने के लिए भाजपा को छह सीटों पर जीत दर्ज करनी होगी। यदि वह ऐसा नहीं कर पाती है तो कयास लगाए जा रहे हैं कि यहां भी महाराष्ट्र की महाभारत की तरह ‘नाटक’ देखने को मिल सकता है।

भाजपा को सत्ता से बेदखल करने के लिए साथ आ सकते हैं कांग्रेस-जेडीएस
महाराष्ट्र में शिवसेना-एनसीपी-कांग्रेस गठबंधन की सरकार बनाने के बाद कांग्रेस की नजर अब कर्नाटक उपचुनाव पर है। कर्नाटक में कांग्रेस ने बीते रविवार को संकेत दिया था कि उपचुनाव में सत्तारूढ़ भाजपा को बहुमत के लिए जरूरी सीटें नहीं मिल पाने की स्थिति में वह एक बार फिर जेडीएस के साथ हाथ मिला सकती है। कांग्रेस ने कहा था कि वह एक बार फिर जेडीएस के साथ हाथ मिलाने के विरूद्ध नहीं है। वहीं जेडीएस के नेता पहले ही ऐसे संकेत दे चुके हैं कि पार्टी ऐसी संभावना के लिए तैयार है।

08:05 AM, 09-DEC-2019
एग्जिट पोल भाजपा के पक्ष में
एग्जिट पोल की बात करें तो स्थानीय चैनलों ने भाजपा को 9 से 12 सीटें मिलने का अनुमान जताया है। वोटों की गिनती से पहले येदियुरप्पा ने कहा, हम अपना कार्यकाल पूरा करेंगे। लोगों को भी हमसे यही उम्मीद है। वहीं, कांग्रेस व जेडीएस ने विश्वास जताया है कि अयोग्य ठहराए जाने के बाद अब भाजपा से चुनाव लड़ रहे प्रत्याशियों को जनता नकार देगी।
07:41 AM, 09-DEC-2019
क्यों आई उपचुनाव की नौबत
कांग्रेस और जेडीएस के 17 बागी विधायकों को अयोग्य घोषित किए जाने के बाद 15 सीटों पर उपचुनाव कराया गया। हाईकोर्ट में चल रहे मुकदमे की वजह से दो सीटों पर उपचुनाव नहीं कराया गया है। इन 15 सीटों में से 12 पर कांग्रेस और तीन जेडीएस के पास थीं। 224 सदस्यों वाली विधानसभा में 17 विधायकों के अयोग्य घोषित होने के बाद यह संख्या 207 पर आ गई थी और 29 जुलाई को बीएस येदियुरप्पा ने विश्वास मत हासिल कर लिया।

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