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कर्नाटक में जारी संकट के बीच कुमारस्वामी का ‘त्याग-पत्र’ वायरल, जानें क्या है माजरा

19 07 2019 hd kumarswami 19414174 m 1

कर्नाटक में जारी सियासी उठापटक के बीच आज तीसरे दिन में बहुमत परीक्षण की प्रक्रिया पूरी होने की उम्मीद नहीं लग रही है। इस बीच कर्नाटक विधानसभा में जारी हंगामे के बीच कुमारस्वामी का त्यागपत्र सामने आया है। विधानसभा में कुमारस्वामी के टेबल पर उनका त्यागपत्र देखा गया है। हालांकि, इस पर मुख्यमंत्री कार्यालय ने सफाई दी है कि यह पत्र फेक है। समाचार एजेंसी एएनआई ने यह वीडियो कर्नाटक विधानसभा के सौजन्य से जारी किया है। बता दें कि कर्नाटक में फ्लोर टेस्ट पर स्पीकर ने कहा कि वह 12 बजे रात तक बैठने को तैयार हैं।
त्यागपत्र की खबर पर कुमारस्वामी ने विधानसभा में कहा कि मुझे जानकारी मिली कि मैंने राज्यपाल को अपना इस्तीफा सौंप दिया है। मुझे नहीं पता कि सीएम बनने का इंतजार कौन कर रहा है। किसी ने मेरा जाली हस्ताक्षर किया है और सोशल मीडिया पर उसी का प्रसार किया है। मैं पब्लिसिटी के सस्ते स्तर पर हैरान हूं।
गौरतलब है कि कर्नाटक के मुख्यमंत्री एच डी कुमारस्वामी द्वारा पेश विश्वास प्रस्ताव पर विधानसभा में तीसरे दिन सोमवार को भी चर्चा जारी है। उधर कांग्रेस का कहना है कि बागी विधायकों के इस्तीफे पर अध्यक्ष का फैसला आने तक विश्वास प्रस्ताव पर मतविभाजन न कराया जाए। विधानसभा की कार्यवाही शुरु होने के समय से ही अध्यक्ष के. आर. रमेश ने सरकार को बार बार शक्ति परीक्षण की प्रक्रिया सोमवार को पूरी करने के अपने वादे का सम्मान करने की याद दिलायी।
एक घंटे की देरी से सदन की कार्यवाही शुरू होने पर अध्यक्ष ने कहा, ” सबकी नजर हम पर है। मुझे बलि का बकरा ना बनाएं। अपने लक्ष्य (शक्ति परीक्षण की प्रक्रिया पूरी करने) तक पहुंचें। कुमारस्वामी ने पिछले सप्ताह बृहस्पतिवार को विधानसभा में विश्वास प्रस्ताव रखा था। सत्तारूढ़ कांग्रेस-जद(एस) गठबंधन के 16 विधायकों के इस्तीफे और दो निर्दलीय विधायकों के समर्थन वापस लेने के कारण सरकार का भविष्य अधर में है। राज्यपाल वजुभाई वाला ने पहले शुक्रवार दोपहर डेढ़ बजे तक और बाद में दिन की समाप्ति तक विश्वास प्रस्ताव पर प्रक्रिया पूरी करने को कहा था। शुक्रवार को प्रक्रिया पूरी नहीं होने के बाद अध्यक्ष ने सरकार से यह वादा लिया था कि वह इसे सोमवार को अवश्य पूरा करेगी।
इसके बाद सदन की कार्यवाही सोमवार तक के लिए स्थगित कर दी गई। अध्यक्ष ने विश्वास प्रस्ताव प्रक्रिया में और देरी नहीं करने पर अपना रुख स्पष्ट किया, ”इससे मेरा या सदन का अपमान होगा। ऐसी खबरें है कि सत्तारूढ़ गठबंधन ने मत-विभाजन के लिए और दो दिन का वक्त मांगा है। अध्यक्ष ने कहा, ”हम जीवन सार्वजनिक में हैं। जनता हमें देख रही है। अगर लोगों में यह विचार बन रहा है कि चर्चा के नाम पर हम समय बर्बाद कर रहे हैं तो यह मेरे या किसी के लिए भी सही नहीं होगा।

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