Site icon Yashbharat.com

कर्नाटक का साइड इफेक्ट, छह महीने बाद होगा कांग्रेस को अहसास

13 39 143384000ss ll

वेब डेस्क। कर्नाटक चुनाव में तमाम एग्जिट पोल के अनुमानों को झुठलाते हुए भाजपा ने अकेले के दम पर सरकार बनाने की तरफ कदम बढ़ा दिए है. दक्षिण भारत में भगवा लहर में कांग्रेस ने अपना मजबूत गढ़ भी गंवा दिया और पार्टी अब महज तीन राज्यों में सिमट कर रह गई है. ये नतीजे कांग्रेस के लिए गहरे जख्म देने वाले है, जिसका दर्द कांग्रेस को छह महीने बाद भी झेलना पड़ सकता है.

दरअसल, इस साल के अंत में मध्य प्रदेश, राजस्थान और छत्तीसगढ़ में चुनाव होने है. कांग्रेस को उम्मीद है कि तीनों जगहों पर वह भाजपा को पटखनी देकर सत्ता पर काबिज हो सकती है. इसके लिए कर्नाटक के चुनाव नतीजे बेहद अहम माने जा रहे थे.

राजनीति के जानकार बताते हैं कि कर्नाटक के नतीजों के साइड इफेक्ट कांग्रेस को इन तीन राज्यों में भी झेलने पड़ेगे. यदि नतीजे कांग्रेस के पक्ष में होते तो इन राज्यों में भी भाजपा के खिलाफ एक लहर चलने की उम्मीद की जा रही थी, लेकिन कर्नाटक ने मोदी और शाह की जोड़ी ने बाजी पलट दी.

त्रिशंकु विधानसभा की आशंका के बीच भाजपा का सत्ता में काबिज होना कांग्रेस के लिए इन तीनों राज्यों में चुनौती को कम करने के बजाए और कठिन ही बनाएगा. मध्य प्रदेश और राजस्थान में उपचुनाव में मिली सफलता के बाद कांग्रेस को इन राज्यों में बेहतर प्रदर्शन के आसार नजर आ रहे थे. छत्तीसगढ़ में कांग्रेस और भाजपा के बीच पहले से ही कड़ी टक्कर होती रही है. ऐसे में कर्नाटक में कांग्रेस की सत्ता में वापसी हो जाती तो इन तीनों राज्यों में पार्टी के जीत की संभावनाएं बढ़ जाती.

जानकार बताते हैं कि नरेंद्र मोदी और अमित शाह के आखिरी मोमेंट पर गेम चेंजर प्लान के आगे कांग्रेस बेबस हो जाती है. शुरुआती दौर में कांग्रेस की बढ़त मतदान आने तक कम होती जाती है. गुजरात के बाद कर्नाटक में भी ऐसा ही देखने को मिल रहा है.

वहीं, भाजपा के नेता अब आक्रमक तेवर में नजर आ रहे हैं. मध्य प्रदेश के जनसंपर्क मंत्री नरोत्तम मिश्रा ने अमित शाह के कुशल संगठन क्षमता को जीत की वजह बताया. राहुल गांधी पर निशाना साधते हुए कहा, ‘ये अपनी सुविधा से जनेऊ और टोपी पहनते हैं. इन्हें समझ जाना चाहिए कि जनता बेवकूफ नहीं है. गुजरात में मस्जिद नहीं गए, एमपी में भी नहीं जाएंगे.’

Exit mobile version