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कब सामान्य होगा ट्रेनों का परिचालन? रेलवे ने ये दिया जवाब

22 11 2020 tejas train 1200

Indian Railway Update News कोरोना महामारी के कारण भारतीय रेल सेवाएं लंबे समय से बाधित है। रेलवे बोर्ड ने फिलहाल न्यूनतम जरूरत के हिसाब से कुछ ही ट्रेनों के परिचालन को मंजूरी दी है। आखिर में हर किसी में मन में यह सवाल जरूर है कि आखिर देशभर में ट्रेनों का परिचालन कब तक सामान्य हो जाएगा और सभी ट्रेनें देशभर में पहले की तरह कब से चलना शुरू हो जाएगाी। अब इस सवाल पर रेलवे बोर्ड ने अपना रुख साफ कर दिया है। रेलवे बोर्ड के अध्यक्ष वीके यादव ने आज साफ कहा कि सभी ट्रेनों को वापस पटरी पर लाने में अभी समय लगेगा। यादव ने कहा कि रेलवे की सभी ट्रेनें कब से शुरू होगी, इसका समय अभी नहीं बताया जा सकता है। गौरतलब है कि देश में फिलहाल कोरोना वायरस के मामले प्रतिदिन कम हो रहे हैं, लेकिन खतरा अभी भी दूर नहीं हुआ है।

फिलहाल देश में रोज 1089 मेल और एक्सप्रेस ट्रेनों का संचालन कर रहा है। कोरोना महामारी के पहले रेलवे द्वारा 1768 ट्रेनों का संचालन किया जा रहा था। रेलवे बोर्ड के अध्यक्ष व CEO वीके यादव ने कहा कि अब तक हम 1768 ट्रेनों की तुलना में 1089 मेल और एक्सप्रेस ट्रेनों का संचालन कर रहे हैं। जैसे-जैसे परिस्थिति में सुधार होता जाएगा बाकी ट्रेनों का परिचालन भी शुरू कर दिया जाएगा, लेकिन फिलहाल इसके बारे में कोई तारीख की घोषणा नहीं की जा सकती है।

लगातार बढ़ रही ट्रेनों की मांग

रेलवे बोर्ड के अध्यक्ष वीके यादव ने कहा कि रेलवे 264 कोलकाता मेट्रो ट्रेनों और 3936 उपनगरीय सेवाओं का संचालन कर रहा है। उन्होंने बताया कि कोरोना महामारी के दौरान ट्रेनों की अधिक मांग और वेटिंग लिस्ट की अधिकता के कारण 20 विशेष क्लोन ट्रेनों का संचालन किया गया, जो फिलहाल चल रही है। यादव के मुताबिक त्योहारी सीजन के दौरान भीड़ कम करने तथा टिकटों की मांग को देखते हुए 618 विशेष ट्रेनों का संचालन किया गया था। उन्होंने बताया कि रेलवे द्वार देशभर में 131 यात्री ट्रेनें चलाया जा रहा है। जरूरत पड़ने पर सरकार की अनुमति से कुछ और ट्रेनों को चलाया जा सकता है।

महामारी के कारण रेलवे को काफी आर्थिक नुकसान हुआ है। बीत साल के मुकाबले रेलवे की कमाई 87 फीसद कम हुई है। पिछले साल जहां 53 हजार करोड़ की कमाई हुई थी। वहीं अभी तक सिर्फ 4600 करोड़ रही है। कैग की रिपोर्ट के मुताबिक साल 2017-18 में भारतीय रेल को अपनी सेवाओं के बदले में 98.44 रुपए खर्च करके 100 रुपए मिले हैं, जबकि साल 2015-16 में रेलवे को 90.49 रुपए खर्च करके 100 रुपए की कमाई होती थी।

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