कपिल मिश्रा पर भाजपा में दो फाड़, कुछ कर रहे विरोध तो कुछ ने समर्थन में मीडिया में चलाया अभियान

नई दिल्ली। मंगलवार को पूर्वी दिल्ली के सांसद गौतम गंभीर और दिल्ली प्रदेश अध्यक्ष मनोज तिवारी ने कपिल मिश्रा के खिलाफ कार्रवाई किए जाने की बात कही, लेकिन देर रात तक पार्टी के ही कुछ नेता कपिल मिश्रा के पक्ष में भी खड़े दिखाई दिए।

कपिल मिश्रा के पक्ष में सोशल मीडिया पर कैंपेन भी चलाया जाने लगा है, जो लोगों के लिए चिंताजनक बना हुआ है। वहीं, कुछ नेताओं का स्पष्ट मानना है कि अगर इस तरह की सोच को बढ़ावा दिया गया तो यह दीर्घकालिक राजनीति के हिसाब से पार्टी के हित में नहीं होगा।

इस तरह हो रहा विरोध

पार्टी के शीर्ष नेता मानते हैं कि कपिल मिश्रा हों या सांसद प्रवेश वर्मा, दोनों के भड़कीले बयान पार्टी की गलत छवि लोगों के मन में स्थापित कर रहे हैं। दिल्ली विधानसभा चुनाव में पार्टी को मिली करारी हार को भी इसी तरह की बयानबाजी का परिणाम माना जा रहा है।

पार्टी के कुछ नेताओं की इसी सोच की वजह से गौतम गंभीर और मनोज तिवारी ने मीडिया में कपिल का विरोध किया।

दिल्ली की विशेष जिम्मेदारी निभा रहे भाजपा के एक राष्ट्रीय नेता के मुताबिक प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत लगातार सबका साथ और सबके विकास की बात कर रहे हैं। चुनाव के साथ-साथ पार्टी के विस्तार में इसका काफी सकारात्मक असर देखने को मिल रहा था।

आरएसएस प्रमुख ने भी स्पष्ट कर दिया है कि हिंदुस्तान की कल्पना मुसलमानों के बिना अधूरी है। ऐसे में पार्टी के छुटभैये नेताओं की गलतबयानबाजी पार्टी के लंबे भविष्य की दृष्टि से नुकसान पहुंचा सकती है।

सोशल मीडिया में चला अभियान

वहीं, पार्टी के कुछ लोग कपिल मिश्रा को अभी से बचाने की कोशिश करने लगे हैं। मीडिया संदेशों में कहा जा रहा है कि अगर कपिल मिश्रा ने अपना बयान नहीं दिया होता, तो कश्मीर से पांच लाख पंडितों का पलायन नहीं होता।

एक अन्य संदेश में कहा जा रहा है कि अगर कपिल मिश्रा ने बयान न दिया होता तो बाबर भारत पर आक्रमण नहीं करता और अयोध्या का मंदिर नहीं तोड़ता। यह संदेश प्रसारित करने वालों में इसी विधानसभा चुनाव में प्रत्याशी भी शामिल हैं।

कपिल मिश्रा के बयान से भड़का दंगा

भाजपा नेता कपिल मिश्रा के रविवार को दिए आपत्तिजनक बयान को दिल्ली में हिंसा भड़कने के पीछे बड़ा कारण माना जा रहा है। कथित रूप से उन्होंने दिल्ली पुलिस के सामने तीन दिन के अंदर रोड खाली न होने पर गंभीर परिणाम होने की बात कही थी। इसके बाद ही मौजपुर, भजनपुरा, घोंडा, करावल नगर और लोनी के अनेक इलाकों में दंगे फैल गए।

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