मुरैना। निजामुद्दीन से हैदराबाद जाने वाली सदर्न एक्सप्रेस के स्वलीपर कोच में अज्ञात परिवार एक बच्ची को छोड़ गया। झांसी कंट्रोल रूम से सूचना मिलने के बाद मुरैना जीआरपी ने बच्ची को स्लीपर कोच से उतार लिया और जिला अस्पताल में भर्ती कराया। हालांकि सुबह जिला अस्पताल से बच्ची की छुट्टी कर दी गई।
बच्ची को अभी अभ्युदय आश्रम में रखा गया है। जीआरपी अब बच्ची के परिजनों का पता लगाने का प्रयास कर रही है। बच्ची दिव्यांग है और उसकी रीढ़ की हड्डी में परेशानी है। इसलिए संभवतः माना जा रहा है कि बालिका को जानबूझ कर छोड़ा गया है।
घटनाक्रम के मुताबिक सोमवार रात करीब एक बजे जीआरपी मुरैना को झांसी कंट्रोल रूम से सूचना मिली कि निजामुद्दीन से हैदराबाद जाने वाली सदर्न एक्सप्रेस ट्रेन के स्लीपर कोच एस 3 में 17 नंबर बर्थ पर एक बच्ची है। जिसके पास कोई नहीं है। संभवत कोई उसे छोड़ गया है। बच्ची की बर्थ के आसपास की बर्थ पर यात्रा कर रहे यात्रियों ने टीटी अभिजीत तोमर को सूचना दी। अभिजीत ने झांसी कंट्रोल रूम को सूचना दी। ट्रेन के आने पर रात करीब 3.15 बजे जीआरपी कर्मचारियों ने स्लीपर कोच से बच्ची को उतार लिया।
बच्ची के पास मिला यह सामान
बच्ची जिस बर्थ पर थी, उसी पर एक झोला रखा था। जिसमें बच्ची के कपड़े, दूध की बॉटल, बिस्किट सहित अन्य सामग्री थी। जिसे जीआरपी अपने साथ ले आई। चूंकि बच्ची जो कपड़े पहने है और झोले में जो कपड़े मिले हैं, उससे लगता है कि बच्ची किसी अच्छे परिवार की है।
तो इसलिए छोड़ा गया है बच्ची को
अस्पताल से बच्ची को जब अभ्युदय आश्रम में लाया गया और बच्ची को दूध पिलाने का प्रयास किया गया तो उसकी गर्दन भी एक तरफ जा रही थी और उसके पैर भी काम नहीं कर रहे थे। ऐसे में डॉक्टरों का कहना है कि बच्ची की रीढ़ की हड्डी में परेशानी है इसलिए हो सकता है कि बच्ची को उसके परिजनों ने छोड़ दिया हो।
दोबारा से किया अस्पताल में भर्ती
बच्ची को खड़ा करने व गर्दन के सही काम न करने पर उसे आश्रम से दोबारा से बाल रोग विशेषज्ञ के पास ले जाया गया। जहां पर उसे डॉक्टर ने भर्ती कर लिया और अब बच्ची की सभी जांचें की जा रही हैं। जिससे उसकी बीमाारी का पता लग सके।
चेहरा इतना मासूम की कि सभी को कर रही थी आकर्षित
बच्ची बेशक एक साल की है, लेकिन वह इतनी सुंदर है कि देखने वालों को अपनी ओर आकर्षित कर रही थी। बच्ची की मासूमियत को देखते हुए पहले तो जीआरपी जवान ही उसकी सेवा में लग गए। इसके बाद अस्पताल में भी नर्सों ने बच्ची को काफी सेवा की। साथ ही जब बच्ची आश्रम में पहुंची तो सभी उसे खिलाने लगे।
इनका कहना है
कंट्रोल रूम से रात में सदर्न एक्सप्रेस के एस 3 में 17 नंबर बर्थ पर लावारिस बच्ची होने का प्वाइंट मिला। इसके बाद ट्रेन आने पर बच्ची को ट्रेन से उतार लिया गया और अस्पताल में भर्ती कराया गया। बच्ची के परिजनों का पता लगाने व किसने क्यों बच्ची को छोड़ा का पता लगाने के लिए जांच शुरू कर दी है – एचसी लाल, थाना प्रभारी, जीआरपी मुरैना
