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आचार संहिता में कैसे हो गई भर्ती?

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मेडिकल कॉलेज में आया एक भर्ती घोटाला सामने
जबलपुर,नगर प्रतिनिधि। मेडिकल कॉलेज के दंत चिकित्सा विभाग में एक बड़ा भर्ती घोटाला सामने आया है । जहां पर दंत चिकित्सक पोस्ट में सीनियर रेजिडेंट के पद की नियुक्ति रातों रात कर दी गई है । विज्ञापन दोहरे मापदंड के अनुसार दिया गया था जहां अखबार का विज्ञापन और वेबसाइट का विज्ञापन अलग-अलग था अखबार के विज्ञापन में जहां एक सीट दर्शाई गई थी जो कि अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के खाते वाली थी वहीं वेबसाइट पर जो विज्ञापन दिया था उसमें 5 सीटें थी। दिनांक 19 नवंबर को यह विज्ञापन निकला और 22 नवंबर को इंटरव्यू लेकर 23 को नियुक्ति कर दी गई । आचार संहिता में जहां एक और किसी भी प्रकार की नियुक्ति नहीं की जाती है । वहीं मेडिकल कॉलेज प्रशासन ने चिकित्सकों के रिश्तेदारों की भर्ती करके एक बार फिर से खुद को सर्वे सर्वा घोषित कर दिया है।

एचओडी को भी नहीं लगी खबर
यश भारत की पड़ताल में यह सामने आया की की वहां मौजूद एचओडी को भी यह खबर नहीं लगी कि आज उसके डिपार्टमेंट में 5 नए दंत चिकित्सकों की भर्ती है संभावना जताई जा रही है कि यह भर्ती पूर्णता व्यक्तिगत हित साधने के लिए वहां मौजूद प्रशासन और प्रशासनिक रूप से वहां के डीन ने की है।

नियुक्त चिकित्सक किसी न किसी के रिश्तेदार
नियुक्त चिकित्सकों में कुछ चिकित्सक वहीं कार्यरत चिकित्सक के संबंधित एवं रिश्तेदार बताए जा रहे हैं इतनी आनन-फानन में आचार संहिता के दौरान इन नियुक्तियों को लेकर पूरे खेमे में हलचल मची हुई है लेकिन प्रशासनिक अधिकारी कह रहे हैं अब नियुक्ति हो गई है अब कोई बाल भी बांका नहीं कर सकता
पीएचडी एंट्रेंस भी रहा विवादों में
विगत कुछ दिनों से जिस तरह मेडिकल यूनिवर्सिटी में पीएचडी की डेट लगातार 3 माह से आगे बढ़ रही है वही मेडिकल कॉलेज का प्रशासनिक अमला बी खुद को स्वयंभू मठाधीश घोषित करते जा रहा है और रातो रात जिस तरह नियुक्तियां की जा रही हैं उस पर किसी भी प्रकार की कोई कार्यवाही नहीं हो पा रही है,

एडवरटाइजमेंट की जानकारी मांगे जाने पर मची खलबली
यश भारत की पड़ताल में यह सामने आया है कि वेबसाइट का ऐड और पेपर में दिया ऐड दोनों ही अलग हंै पिछले दिनों असिस्टेंट प्रोफेसर के पदों में भी इसी तरह का गुणा भाग किया गया था । एडवरटाइजमेंट की जानकारी मांगे जाने पर खलबली मच गई है।

चल रहा है भाई भतीजा वाद
मेडिकल कॉलेज अस्पताल में मरीजों के स्वास्थ्य और अस्पताल की गुणवत्ता के साथ लगातार जिस तरह खिलवाड़ हो रहा है उसका सबसे बड़ा कारण वहां पर मौजूद भाई भतीजा बाद है इसके कारण की अन्य चिकित्सकों को हवा ही नहीं लगती और वहां मौजूद चिकित्सक अपने रिश्तेदारों की भर्तियां रातों-रात करवा लेते हैं इसके अलावा वहां पदस्थ रहते हुए भी बाहर लगातार प्रैक्टिस की जा रही है जिस पर कि किसी भी प्रकार की नकेल नहीं कसी गई है।
कमिश्नर की अध्यक्षता में होती है नियुक्तियां
जहां एक और सीनियर रेजिडेंट की नियुक्ति के लिए कमिश्नर के अध्यक्षता में नियुक्तियां होना अनिवार्य है और निष्पक्ष रुप से डीन एवं एचओडी के जानकारी के बाद एडवर्टाइजमेंट के 15 दिन के बाद इंटरव्यू कराए जाने चाहिए वहीं आचार संहिता के दौरान इन सभी नियमों को किनारे रखते हुए मात्र 3 से 4 दिन में पूरी प्रक्रिया समापन करके भर्ती कर दी गई है और इसके बाद भी जब वहां पर हमने दंत चिकित्सा का जायजा लिया तो हमें पता चला कि वहां पर दांत उखाडऩे के अलावा कोई कार्य नहीं होता मेडिकल कॉलेज में चल रहे इस भाई भतीजा वाद का फायदा वहां कार्यरत चिकित्सक भरपूर रूप से उठा रहे हैं अत: सरकार चाहे कोई भी रहे उन्हें कोई फर्क नहीं पड़ता अगर पापा डॉक्टर हैं तो बेटा भी सरकारी डॉक्टर बनेगा यदि बड़ा भाई चिकित्सक है तो छोटा भाई भी चिकित्सक बनेगा इसी फार्मूले के साथ समाज और देश के स्वास्थ्य का कल्याण किया जा रहा है ।

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