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आचार संहिता के पहले BJP ने प्रचार का आधा काम पूरा कर लिया, 25 को पीएम करेंगे कार्यकर्ताओं को सम्बोधित

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BJP ने विधानसभा चुनाव की घोषणा से पहले ही विपक्षी पार्टी पर मानसिक दबाव बनाने के लिए नई रणनीति के तहत काम किया। लगातार बैठक कर केंद्रीय नेतृत्व ने प्रदेश के नेताओं के साथ ही संगठन के पदाधिकारियों को सक्रिय किया। इसके साथ ही भाजपा की जन आशीर्वाद यात्रा में एक दर्जन से ज्यादा केंद्रीय नेताओं के साथ तीन राज्यों के मुख्यमंत्रियों को मैदान में उतार दिया। इस बार पार्टी ने चुनावी खर्च बहीखाता खुले उससे पहले ही प्रचार का आधा काम पूरा कर लिया है।

कमजोर पक्ष को मजबूत करने पर फोकस
भाजपा ने इस बार 2018 की गलतियां ना दोहराने के लिए तैयारी की है। अपने कमजोर पक्ष को मजबूत करने पर भी पूरा फोकस लगाया। इसके लिए सबसे ज्यादा आदिवासी वर्ग को साधने के लिए कार्यक्रम किए। प्रदेश में पिछले एक-डेढ़ साल से केंद्रीय नेता से लेकर संगठन के पदाधिकारी सक्रिय हो गए। बता दें, पिछले चुनाव में आदिवासी वर्ग के लिए आरक्षित 47 में से सिर्फ 16 सीटें भाजपा को मिली थी। यहीं, वजह है कि भाजपा के हाथ से सत्ता चली गई थी। भाजपा ने कमजोर पक्ष को मजबूत करने पर फोकस किया।

 फैसलों पर अटल भाजपा 
पार्टी के प्रत्याशियों की पहली सूची जारी करने के बाद कई सीटों पर विरोध शुरू हो गया था। स्थानीय नेता और पूर्व जनप्रतिनिधि  प्रत्याशियों को बदलने की मांग को लेकर पार्टी के खिलाफ खड़े हो गए और पार्टी छोड़ने तक की चेतावनी दे दी। इसके बावजूद पार्टी के नेता अपने फैसले पर अडिग रहे। वहीं, पार्टी में नाराज और असंतुष्ट नेताओं को मनाने के लिए पार्टी ने बहुत पहले प्रयास शुरू कर दिए। कुछ नेता फिर भी पार्टी छोड़कर चले गए। हालांकि, पार्टी की तरफ से कहा गया कि जाने वालों का कोई जनाधार नहीं है।

पिछली बार 6 अक्तूबर को लगी थी आचार संहिता 
मध्य प्रदेश समेत पांच राज्यों में इस बार चुनाव होने हैं। चुनाव आयोग ने अपनी तैयारी तेज कर दी है। पिछली बार विधानसभा चुनाव की आचार संहिता छह अक्तूबर को लगी थी। इस बार भी प्रदेश में अक्तूबर माह के दूसरे सप्ताह में आचार संहिता लगने की बात कही जा रही है।

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