Site icon Yashbharat.com

Katni: अष्टमी का यह नजारा, न तो सड़कों पर भीड़ न ही रामलीला के संवाद, गरबे की थाप और भंडारा

671444 jabalpurnurse

कटनी। शहर में दुर्गोत्सव ऐतिहासिक होता है। सप्तमी से जनमेदनी सड़कों पर उमड़ती है। अष्टमी से रतजगा शुरू हो जाता है। सड़कें माता की अगवानी में दुल्हन की तरह सज जाती हैं। एक दुर्गा पंडाल की लाइटिंग समाप्त होती है तो दूसरे के शुरू हो जाती है। लॉक और जीवित झांकियों को देखने लोग घण्टों लाइन में खड़े रहकर जयकारा लगाते दिखते हैं। शहर की दो प्रमुख रामलीला गोलबाजार और घण्टाघर से प्रसंगों की आवाज मन को ऊर्जामयी करती है। पात्रों के ओज पूर्ण संवाद को सुनकर कोई भी ठिठक कर रामलीला देखने को विवश होता है।

यहां पैदल चलना होता था मुश्किल

यह सब कुछ पिछले वर्ष तक मध्यप्रदेश की बारडोली कही जाने वाले कटनी शहर में शोभायमान था। अष्टमी पर शहर के कुछ मार्गों पर गुजरना रात्रि 12 बजे के बाद ही हो सकता था। चार पहिया वाहन तो दूर दो पहिया वाहन या पैदल चलना भी मुश्किल होता था। खास आजाद चौक से झंडा बाजार तक लोग की भीड़ नवरात्रि की रात को श्रद्धा और आस्था के संगम की त्रिवेणी बना रखतीं थीं।

दूर गांव कस्बे से नहीं आये लोग

तीन दिन दुर्गा प्रतिमाओ को देखने वाले फिर चौथे दिन शहर के करीब 9 दशक पुराने रावण महाराज के नेतृत्व वाले चल समारोह को देखने दूसरे जिलों के लोग भी कटनी आकर गदगद होते थे।

छोटी छोटी प्रतिमा

आज सब कुछ वैसा नजर आने की जद्दोजहद करता दिख रहा था। छोटी छोटी दुर्गा प्रतिमाओं को रख कर समितियां औपचारिक नवरात्र मनाने की कोशिश करती प्रतीत थीं । कहीं तेज आवाज में संगीत बज रहा था, तो समिति के सदस्य ही उसे बार बार धीमा करने के लिए कह रहे थे।

गरबे में रंग जाता था शहर

एक सप्ताह पहले से गरबे में रंगे शहर के बड़े स्थान इस कदर सूने थे मानों 10 दिन के उत्साह के बाद खुमारी में हैं। न तो भंडारे का प्रसाद था इसके लिए लगतीं श्रदालुओं की कतार नजर आ रहीं थीं, न ही चाट फुल्की डोसा इडली की दुकान में लोग सड़क तक बैठे दिख रहे थे।

कोरोना काल का यह दुर्गोत्सव हमेशा याद रहेगा

कोरोना काल का यह दुर्गोत्सव कटनी में अष्टमी के दिन ऐसा मनाया गया। बुजुर्ग की जुबान पर भी बात यही थी कि देश के किसी भी संकट की घड़ी में भी ऐसे दुर्गोत्सव को नहीं देखा। कोरोना की दहशत ने लोगों को हर वो अहसास करा दिए जिसकी कभी कल्पना भी नहीं हो सकती थी। भला हो ईश्वर की कृपा का जो इस महामारी को इस दौरान काबू में कर कुछ हद तक दुर्गोत्सव मनाने की छूट दे दी। वरना जब अनलॉक में यह हाल था तो लॉक डाउन में दुर्गोत्सव होता तो कैसा नजारा होता? इसकी कल्पना मात्र से ही मन झकझोर सा जाता है।

फिर भी उत्साह

बहरहाल 10 दिवसीय इस महापर्व को कोरोना प्रोटोकॉल के साथ महज औपचारिक निर्वहन जैसा मनाया गया। अष्टमी पर मंदिरों में भीड़ नजर आई तो कुछ प्रमुख स्थानों सड़क चौक चौराहा माता की भक्ति में तलीन नजर आए कुछ सूना सूना सा महसूस हुआ, लेकिन जो प्राप्त वही पर्याप्त को आत्मसात करते कटनी ने दुर्गोत्सव को कोरोना गाइडलाइंस का पालन करते हुए मना लिया। झंडा बाजार की खूबसूरती की मिसाल बनती प्रतिमा के स्थान पर छोटी सी देवी मां सभी को मानो उपदेश दे रहीं थी कि मेरे हर रूप में वही सुख शांति और सम्रद्धि है।

कहीं औपचारिक निर्वहन

गर्ग चौक में भी ऐसी ही एक छोटी प्रतिमा रखी गई थी। लक्ष्मीनारायण मंदिर के आस पास तीन चार स्थानों पर रखी प्रतिमाओं पहले जैसी बड़ी तो नहीं थीं अलबत्ता लोगों को आकर्षित कर रहीं थीं। सुभाष चौक में प्रतिमा नहीं रखी थी इसी तरह कचहरी चौक में सन्नाटा था। केसीएस स्कूल में प्रतिमा लोगों को आकर्षित कर रही थी तो महिला कॉलेज तथा साधुराम स्कूल भी कोविड के प्रोटोकॉल के साथ दुर्गोत्सव मना रहे थे। सिंधु भवन में ताला लगा था तो मिशन चौक में प्रतिमा नहीं रखी गई थी।

नहीं दिखी भंडारे की कतार

शहर में इन तीन चार दिनों में बाहर से आने वाले श्रद्धालु की तादात भी नजर नहीं आ रही थी लोगों के लिए जगह जगह भंडारे का इंतजाम भी सुरक्षा कारणों से नहीं हुआ, कुछ स्थानों को छोड़कर।

कहीं कहीं उत्साह ज्यों का त्यों, अगले साल फिर मनाएंगे दोगुना उत्साह

गोलबाजार तथा सब्जी मंडी में मा महाकाली की प्रतिमा पिछले वर्ष से कुछ छोटी किंतु रोमांचित करने वाली थीं। कुलमिलाकर श्रद्धा आस्था में कमी नजर नहीं आई फिर भी लोगों ने सुरक्षित ढंग से दुर्गोत्सव को फीका नहीं होने दिया इस उम्मीद के साथ कि अगले साल फिर से हम सत्य सनातन उत्साह से सराबोर पुनः दोगुने उत्साह से दुर्गोत्सव का उत्साह मना कर नया कीर्तिमान स्थापित करेंगे।

Exit mobile version