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अदालती कार्रवाई हो सकती है LIVE, सुप्रीम कोर्ट ने दी अनुमति, परीक्षण होगा

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नेशनल डेस्क: केन्द्र ने आज उच्चतम न्यायालय को सूचित किया कि देश भर में अदालती कार्यवाही का सीधा प्रसारण किया जा सकता है। प्रधान न्यायाधीश दीपक मिश्रा, न्यायमूर्ति ए एम खानविलकर और न्यायमूर्ति धनन्जय वाई चन्द्रचूड़ की तीन सदस्यीय खंडपीठ ने सभी पक्षकारों से कहा कि वे अदालत की कार्यवाही के सीधे प्रसारण के लिये दिशा निर्देश तैयार करने के बारे में अटार्नी जनरल के.के. वेणुगोपाल को अपने सुझाव दें।


शीर्ष अदालत ने तीन मई को न्यायिक कार्यवाही के सीधा प्रसारण, वीडियो रिकॉर्डिंग या लिप्यांतरण के बारे में केन्द्र सरकार से जवाब मांगा था। दरअसल वरिष्‍ठ अधिवक्‍ता इंदिरा जयसिंह ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर कर संवैधानिक और राष्ट्रीय महत्व के विषयों पर शीर्ष अदालत में न्यायिक कार्यवाही के सीधे प्रसारण की मांग की थी। उन्होंने रूप से पेश होते हुए कहा था कि नागरिकों को सूचना का अधिकार है और संवैधानिक तथा राष्ट्रीय महत्व के मामलों का सीधा प्रसारण किया जा सकता है।


जयसिंह ने कहा कि पश्चिमी देशों में इस तरह की व्यवस्था पहले से लागू है और अंतरराष्ट्रीय न्याय अदालत सहित अदालत की कार्यवाही की सीधा प्रसारण यूट्यूब पर उपलब्ध है। इसके साथ ही उन्होंने कहा था कि शीर्ष अदालत उन मामलों में सीधे प्रसारण और वीडियोग्राफी पर प्रतिबंध लगा सकती है, जिसमें उसे निजता प्रभावित होने का खतरा हो।

बता दें कि शीर्ष अदालत ने न्यायिक कार्यवाही में पारर्दिशता लाने के इरादे से पिछले साल प्रत्येक राज्य की निचली अदालतों और न्यायाधिकरणों में सीसीटीवी लगाने का निर्देश दिया था। न्यायालय ने यह निर्देश कानून की छात्र स्वपनिल त्रिपाठी की याचिका पर दिया था। इस याचिका में शीर्ष अदालत में परिसर में ही सीधे प्रसारण के कक्ष स्थापित करने और कानून की पढ़ाई कर रहे इंटर्न की इस तक पहुंच उपलब्ध कराने का निर्देश देने का भी अनुरोध किया था।

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