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पूरण सतगुरु का अलौकिक दिव्य दर्शन कर अपने अंतर में अनन्य प्रेम भाव का दिव्य दीपक जलाने का पर्व है वर्सी पर्व

कटनी। माधवनगर में पावन वर्सी महोत्सव का दो दिवसीय कार्यक्रम बड़े ही हर्षोल्लास के साथ जारी है। दिनांक 10 अक्टूबर हरेमाधव सत्संग का आरंभ हुआ। देश विदेश से आई अनेक संगतों ने सतगुरु श्री चरणों में अरदास कर वर्सी पर्व में अपनी हाजिरी लगाई। तत्पश्चात हरे माधव प्रभुमय वाणियों का संगतों ने श्रवण कर अनंत मीठे प्रेम का ह्रदय में आभास किया।

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फिर जैसे ही संगतें सतगुरु दर्शन को व्याकुल हुई तब हरेमाधव शोभायात्रा के साथ हाजिरां हुजूर सतगुरु बाबा ईश्वरशाह साहिब जी का सत्संग पंडाल में अनंतो हर्षोल्लास के साथ श्रीआगमन हुआ, जिसमें सतगुरु जी के पुष्प सज्जित श्रीवाहन के आगे हरेमाधव यूथ टीम कोल्हापुर, सांगली एवं सतना के सेवादार बैण्ड बाजा एवं लोकनृत्य करते हुए चल रहे थे, तथा मार्च परेड के साथ सतगुरु जी की शोभायात्रा हरेमाधव दरबार साहिब से सत्संग प्रांगण तक पहुंची। साथ ही सभी संगतें श्रीदर्शन कर हरेमाधव के पवित्र जयघोष कर, खुशी में झूमते-नाचते आनंदमय हुई ।

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सतगुरु साहिबान जी के आगमन के पश्चात् हरेमाधव रूहानी बाल संस्कार के नन्हें बाल गोपालों ने श्री चरणों में भाव भीना नमन वंदन किया। तत्पश्चात् सेवकों द्वारा हरिराया सतगुरु बाबा ईश्वरशाह साहिब जी के भजन श्रीमुख से उच्चारित हरेमाधव सद्ग्रंथ वाणियों का गायन किया गया, जिसका श्रवण कर सभी संगतों भगतों की आतम प्रेमा भक्ति के मानसरोवर में गोते मार रही।

हरेमाधव बाल संस्कार के बच्चों ने प्रस्तुति नमस्तस्यै नमस्तस्यै चरण वंदना प्रस्तुत कर अपने निर्मल भाव अर्पित किए पश्चात् हरेमाधव रूहानी बाल संस्कार एवं हरे माधव यूथ टीम द्वारा भावपूर्ण एकांकी ‘‘भगतन पाया भगत भंडारा, तिन भगतन का तू एको प्यारा’’ प्रस्तुत की गयी, जिसमें भगतों पर हुई सतगुरु जी की प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष मेहर से भरपूर हरेमाधव भांगाउपदेश साखियों  को मंचित किया गया। पात्रों के अभिनय ने पूर्ण रूप से संगतों को एकांकी से जोड़े रखा। इस एकांकी का सारगर्भित भाव यह रहा कि जीवन की स्वांसे वे सफल हैं, जो पूरण सतगुरु भगति, सतगुरु श्रीदर्शन, सतगुरु नाम में बींते क्योंकि मनुष्य जीवन का मूल ध्येय मुक्ति नहीं, साची सतगुरू भक्ति है, उसी में असल सुख, असल शांति है। तत्पश्चात् एल,ई,डी, पर सतगुरु उपकारी लीलाओं का मंचन बच्चों ने किया अनेक संगतों ने भी अपने उपर हुए सतगुरु उपकारों को बताया एवं सतगुरु बाबा नारायणशाह जी के करामाती लौटे का वृत्तांत कर चमत्कारी लौटे का दर्शन संगतों को करा निहाल किया हरेमाधव भजन रागों गीत संगीत भजन कीर्तन से सारा आभामण्डल भक्ति प्रेमामय सा हो गया , हरेमाधव परम धुनि के पश्चात् सभी ने हरे माधव ब्रम्ह भोजन प्रसाद ग्रहण किया

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