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इतनी सी हुई खता, जुबां वालों की बस्ती में आ गए बेजुबां, लापरवाही की पराकाष्ठा से बिछड़ गया हाथी राम-बलराम का जोड़ा

जबलपुर, आशीष शुक्ला। कल तक दूर से भटक कर जबलपुर पहुंचे 2 हाथियों की चिंघाड़ से बरगी क्षेत्र दहशतजदा था, लेकिन इन हाथियों के जोड़े को क्या पता था कि वह तो सिर्फ अपनी आवाज से वन में अपनी उपस्थिति का अहसास करा रहे हैं। दरअसल वह उनके जीवन के विक्षोभ की आवाज है। वन विभाग की घोर लापरवाही ने असमय इस जोड़े को खंडित कर दिया। सिर्फ डर ने लोगों को इन विशालकाय जानवर को तड़पा तड़पा कर मौत की नींद सुला दिया।

इन बेजुबानों का गुनाह सिर्फ इतना था कि ये जुबां वालों की बस्ती में भटक कर आ गए थे। मानव से बड़ा दुश्मन कोई नहीं यह बात जानवर को शायद नहीं मालूम उस पर लाचार बेबस खानापूर्ति वाले भृष्ट सरकारी तंत्र जिसने एक हाथी जैसे ग्रेड वन के जानवर की मृत्यु को यूं समझा मानों किसी कुत्ते बिल्ली की मौत हुई।

सवाल तो बहुत सारे उठ रहे हैं पर यह जिम्मेदारों को नजर नहीं आ रहे या फिर जानबूझकर कर इसे नजरअंदाज किया जा रहा है।

सवालों की फेहरिस्त में चर्चा खुलेआम है कि  हाथी के पोस्टमार्टम का वीडियो ग्राफी किसी शासकीय संस्था या मीडिया द्वारा नहीं कराई गई जो अनुचित है। वीडियोग्राफी एक वनरक्षक के द्वारा कराई गई जो वन विभाग जबलपुर पर प्रश्न चिन्ह लगाता है। हाथी की मौत की जानकारी वन मंडल अधिकारी द्वारा छुपाई जा रही है। अब वन विभाग पूरी टीम पूरी रात दूसरे हाथी की खोज में लगी हुई है।

काश पहले ध्यान दिया गया होता

3 दिन पहले हाथी मंडला से होते हुए बरगी वन परीक्षेत्र के अंतर्गत ग्राम मोहस डूंगरिया मे विचरण कर रहे थे इसकी जानकारी वन मंडल अधिकारी जबलपुर को थी किंतु इनके द्वारा कोई ध्यान नहीं दिया गया। कारण यह कि वह सहायक वन संरक्षक परीक्षा के आयोजन में व्यस्त थीं। हाथी आये तो क्या करें सरकारी काम इस वक्त अहम जो था। साफ है कि हाथियों के मामले में कोई रुचि नहीं ली गई। न ही वाइल्डलाइफ भोपाल को कोई सूचना दी गई परिणाम दहशतजदा ग्राम मुहास के ग्रामीणों द्वारा करंट फैलाकर ग्रेड 1 के इस जानवर पर अत्याचार कर मौत के घाट उतार दिया जो वाइल्ड लाइफ एक्ट के तहत घोर लापरवाही का प्रतीक है।

जिम्मेदार पर कार्रवाई क्यों नहीं

दो आरोपियों को तो बरगी वन पर क्षेत्र में गिरफ्तार कर लिया गया है किंतु अभी तक किसी लापरवाह अधिकारी कर्मचारी के विरुद्ध कोई कार्यवाही नहीं की गई ।

पोस्टमार्टम पर उठे सवाल

हाथी का वेटरनरी कॉलेज में पोस्टमार्टम तक नहीं कराया गया। काश्तकार डिपो गोसलपुर में पोस्टमार्टम करा कर हाथी को दफनाया दिया गया ।जो नियम विरुद्ध है। नियम कहते हैं कि है किसी भी grade-1 के जानवर का पोस्टमार्टम वेटनरी कॉलेज जबलपुर में कराया जाता है। खैर अब तो यह सब एक फाइल में दफन होकर जांच फिर जांच और फिर जांच में खो जाएगी। कुछ रोज बाद हमेशा की तरह इसे भुला दिया जाएगा।

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