उपचुनाव का बिगुल बनाम ज्योतिरादित्य और शिवराज की प्रतिष्ठा

भोपाल। मध्य प्रदेश के मुंगावली और कोलारस विधानसभा सीट के लिए उपचुनाव 24 फरवरी को होंगे. उप चुनाव के लिए 30 जनवरी को अधिसूचना जारी होने के साथ ही नामांकन दाखिल करने का कार्य आरंभ हो जाएगा. मतों की गणना 28 फरवरी को होगी।

मध्य प्रदेश के मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने चुनाव आयोग के हवाले से आज यह जानकारी देते हुए बताया कि दोनों सीटों के लिए नामांकन पत्र दाखिल करने की अंतिम तिथि 6 फरवरी होगी. नामांकन पत्रों की जांच 7 फरवरी को होगी और अभ्यर्थियों द्वारा नामांकन वापस लेने की अन्तिम तिथि 9 फरवरी होगी।

राज्य के अशोकनगर के मुंगावली और शिवपुरी के कोलारस विधानसभा क्षेत्र में उपचुनाव हैं, इन दोनों ही स्थानों से कांग्रेस विधायक थे और उनका निधन होने से उपचुनाव होने वाले हैं. दोनों ही क्षेत्रों में चुनावी रंग पूरी तरह चढ़ चुका है.

कांग्रेस की ओर से ज्योतिरादित्य सिंधिया कमान संभाले हुए हैं, तो दूसरी ओर भाजपा के प्रदेशाध्यक्ष नंदकुमार सिंह चौहान, मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान और लगभग एक दर्जन मंत्री तथा संगठन के कई पदाधिकारी जोर लगाए हुए हैं.

दो विधानसभा क्षेत्रों में उपचुनाव कांग्रेस और भाजपा के लिए मुख्‍य चुनाव के सेमीफाइनल 

मध्य प्रदेश में इसी साल होने वाले विधानसभा चुनाव से पहले के दो विधानसभा क्षेत्रों में उपचुनाव कांग्रेस और उसके सांसद ज्योतिरादित्य सिंधिया के साथ भारतीय जनता पार्टी व शिवराज सिंह चौहान के लिए बड़ी चुनौती है. यही कारण है कि तारीख के ऐलान से पहले ही उपचुनाव में जीत के लिए सिंधिया बनाम भाजपा और शिवराज सरकार ने पुरजोर जोर लगा दिया है.

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राज्य के अशोकनगर के मुंगावली और शिवपुरी के कोलारस विधानसभा क्षेत्र में उपचुनाव हैं, इन दोनों ही स्थानों से कांग्रेस विधायक थे और उनका निधन होने से उपचुनाव होने वाले हैं. अभी तारीखों का ऐलान तो नहीं हुआ है, मगर दोनों ही क्षेत्रों में चुनावी रंग पूरी तरह चढ़ चुका है.

कांग्रेस की ओर से ज्योतिरादित्य सिंधिया कमान संभाले हुए हैं, तो दूसरी ओर भाजपा के प्रदेशाध्यक्ष नंदकुमार सिंह चौहान, मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान और लगभग एक दर्जन मंत्री तथा संगठन के कई पदाधिकारी जोर लगाए हुए हैं.

राजनीतिक जानकार कहते हैं कि अशोकनगर और शिवपुरी दोनों ही जिले सिंधिया परिवार के प्रभाव वाले क्षेत्र हैं, यहां से सिंधिया सांसद भी हैं. इसके अलावा सिंधिया का इन क्षेत्र के लोगों से सतत संपर्क रहता है, साथ ही उनका ग्लैमर अभी बरकरार है. ऐसे में भाजपा और उसकी सरकार के लिए कांग्रेस से यह विधानसभा क्षेत्र छीनना आसान नहीं है.

इस इलाके की बीते एक माह की राजनीतिक गतिविधियों पर नजर दौड़ाएं तो एक बात साफ हो जाती है कि भाजपा ने यहां पूरी ताकत झोंक दी है. दोनों विधानसभा क्षेत्रों में शिवराज मंत्रिपरिषद के सदस्य नरोत्तम मिश्रा, रुस्तम सिंह, जयभान सिंह पवैया, उमाशंकर गुप्ता, विश्वास सारंग, लाल सिंह आर्य, भूपेंद्र सिंह यहां का दौरा कर चुके हैं.

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उनके अलावा केंद्रीय मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर और राज्यसभा सांसद प्रभात झा भी बैठकों का हिस्सा बन चुके हैं. तो दूसरी ओर कांग्रेस से अकेले सिंधिया मोर्चा संभाले हुए हैं. प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अरुण यादव व सांसद कांतिलाल भूरिया एक-एक दौरा कर चुके हैं.

राजनीति के जानकारों की मानें तो भाजपा का सारा जोर कोलारस क्षेत्र पर है, मुंगावली में वह ज्यादा सक्रिय नजर नहीं आ रही है. मुख्यमंत्री चौहान अब तक छह से ज्यादा दौरे कर चुके हैं. उन्होंने कोलारस के सहरिया आदिवासियों में कुपोषण कम करने के लिए हर परिवार को एक हजार रुपये मासिक भत्ता देने का ऐलान किया, साथ ही जमीन का पट्टा व मकान देने की घोषणा की. कोलारस में 15 हजार से ज्यादा सहरिया आदिवासी मतदाता हैं.

सिंधिया अपने दौरों के दौरान शिवराज सरकार पर लगातार हमले बोल रहे हैं. उनके शिवराज सरकार पर तीखे हमले जारी हैं. उनका कहना है, “शिवराज सरकार किसान विरोधी है, किसानों को अपना हक मांगने पर गोली मिलती है. इसलिए जब तक इस सरकार को उखाड़ नहीं फेंकता हूं, तब तक फूलों की माला नहीं पहनूंगा.”

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यहां शिवराज सिंह चौहान के पुत्र कार्तिकेय सिंह चौहान भी कोलारस का दौरा कर चुके हैं. इस मौके पर उन्होंने सिंधिया का नाम लिए बगैर हमला बोला. कार्तिकेय ने किरार जाति के मतदाताओं को रिझाने के लिए अपने पिता द्वारा आमजन के लिए किए गए कार्यो का ब्यौरा दिया.

जानकार कहते हैं, ‘मुंगावली और कोलारस के विधानसभा क्षेत्र के उपचुनाव कई लिहाज से अहम हैं, क्योंकि यह विधानसभा चुनाव से पहले के उपचुनाव हैं. यह क्षेत्र सिंधिया परिवार के प्रभाव का है, शिवपुरी से भाजपा की विधायक यशोधरा राजे सिंधिया हैं. वे प्रचार में कितनी रुचि लेती हैं, यह भी भाजपा के लिए अहम सवाल बना हुआ है.’

इन दो विधानसभा क्षेत्रों के चुनाव और अहम इसलिए हो जाते हैं, क्योंकि यह क्षेत्र का संसदीय क्षेत्र ज्योतिरादित्य सिंधिया का है और उन्हें कांग्रेस का भावी मुख्यमंत्री का चेहरा माना जा रहा है, वहीं भाजपा और सरकार के लिए प्रतिष्ठापूर्ण इसलिए है, क्योंकि पिछले दिनों अटेर और चित्रकूट विधानसभा क्षेत्र के उपचुनाव में भाजपा की हार हुई है. वैसे इन दोनों क्षेत्रों से कांग्रेस के ही विधायक थे. ऐसे में अब सब की नजर मुंगावली व कोलारस पर है.

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