बाबा युवतियों से करवाता था मालिश, अश्लील किताबें भी बारमद

दिल्ली। दिल्ली के विजय विहार स्थित आध्यात्मिक विश्वविद्यालय से गुरुवार को 41 नाबालिग लड़कियों को मुक्त कराया गया। इसके बाद धीरे-धीरे आश्रम के ढोंगी बाबा की सच्चाई सामने आने लगी है। आश्रम से मुक्‍त कराई गई युवतियों ने बताया कि बाबा उनसे मालिश कराता था। उन्हें भी बंदी की तरह रखा गया था और परिजनों से भी मिलने नहीं दिया जा रहा था।

 

 

चाइल्ड वेलफेयर कमेटी के सदस्यों ने आश्रम में कई घंटे तक रुक-कर एक-एक लड़की से पूछताछ की और उनके बयान दर्ज किए। लड़कियों ने आश्रम के प्रमुख वीरेंद्र देव दीक्षित समेत कई कर्मचारियों पर गंभीर आरोप लगाए हैं। सभी किशोरियों की काउंसिलिंग कराई जाएगी।

 

 

मुक्त कराई गई किशोरियों को नारी निकेतन में रखा गया है और उनके परिजनों को दिल्ली आने के लिए सूचित कर दिया गया है। इससे पहले दो दिन तक आश्रम से करीब 40 युवतियों व किशोरियों को मुक्त कराया गया था।श्दिल्ली महिला आयोग की अध्यक्ष स्वाति जयहिंद समेत उनकी टीम गुरुवार को दिनभर आश्रम में मौजूद थी। पुलिस के मुताबिक छापेमारी में आश्रम में आध्यात्मिक शिक्षा से जुड़ी एक भी किताब नहीं मिली। वहां से अश्लील किताबें मिली हैं।

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आश्रम के कमरों की तलाशी लेने पर काफी मात्रा में दवाइयां और सीरिंज भी मिली हैं। पुलिस यह पता लगा रही है कि इनका इस्तेमाल क्यों किया जा रहा था। आश्रम में पानी जैसा तरल पदार्थ भी मिला है, जिसे पीने के चंद मिनट के अंदर चक्कर आने लगते हैं। आश्रम के अंदर प्रवेश करने पर सीढ़ियों से होकर रास्ता ऊपर की ओर जाता है, छोटे से रास्ते में तीन दरवाजे हैं और सभी पर ताला लगा हुआ है।

क्यों पेश नहीं हो रहे आश्रम के संस्थापक : हाई कोर्ट

दिल्ली हाई कोर्ट ने आध्यात्मिक विश्वविद्यालय (आश्रम) के उस दावे पर संदेह जताया, जिसमें कहा गया था कि वहां महिलाएं बंधक नहीं थीं। अदालत ने कहा कि यदि वहां महिलाएं स्वतंत्र थीं तो उन्हें तालाबंद दरवाजों के पीछे क्यों रखा गया था। अदालत ने आश्रम की वित्तीय जानकारी भी मांगी और पूछा कि संस्थान के संचालन के लिए पैसा कहां से मिलता है।कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश गीता मित्तल और न्यायमूर्ति सी हरिशंकर की पीठ ने पूछा कि आश्रम के संस्थापक और आध्यात्मिक प्रमुख सच्चे हैं तो वह पेश क्यों नहीं हो रहे। वह कहां हैं?

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आश्रम में जहां लड़कियों और महिलाओं को कथित तौर पर बंधक बनाकर रखा गया था, उसकी सीबीआई जांच के दौरान आश्रम प्रमुख यदि पेश नहीं होते हैं तो उनको लेकर संदेह पैदा होता है।आश्रम के वकील ने पीठ को बताया कि आश्रम के संस्थापक वीरेंद्र देव दीक्षित दिल्ली में नहीं हैं और उन्होंने अदालत के आदेश के बारे में उन्हें किसी और के जरिए संदेश भेजा है।

अदालत ने कहा कि वह जानना चाहती है कि वीरेंद्र कहां हैं। अदालत ने अधिवक्ता से कहा कि वह दीक्षित के बारे में शुक्रवार तक सूचना दें। यदि आप दावा करते हैं कि वहां रहने वाले स्वतंत्र थे तो आश्रम उनकी आवाजाही पर नियंत्रण क्यों रख रहा था? उन्हें किस तरह के कपड़े पहनने चाहिए, इस पर आश्रम का नियंत्रण क्यों था? उनके माता-पिता से मिलने की इजाजत क्यों नहीं दी जा रही थी? आश्रम किसी किले की तरह क्यों दिखता है और हर पांच फीट के अंतराल पर धातु के दरवाजे, जालियां और ताले क्यों हैं? महिलाओं को आश्रम से बाहर जाने की इजाजत क्यों नहीं थी?

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