खुश ना हो कांग्रेस, सुब्रमण्यम स्वामी ने दिलाई जयललिता केस की याद

वेब डेस्क। 2जी स्पेक्ट्रम आवंटन घोटाले पर कांग्रेस को अधिक उत्साहित होने की आवश्यकता नहीं है। बेशक एक लाख 76 हजार करोड़ रुपये के इस तथाकथित स्पेक्ट्रम आवंटन घोटाले में पूर्व दूरसंचार मंत्री ए. राजा, द्रमुक सांसद एम. के कनिमोझी सहित सभी 19 आरोपियों को गुरुवार केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) की विशेष अदालत ने बरी कर दिया हो। लेकिन अभी इन आरोपियों की मुश्किलें कम नहीं हुई हैं।

बेशक कांग्रेस इस फैसले पर जश्न मनाकर भाजपा सरकार पर हमलावर हुई पड़ी है लेकिन अभी भी गेम पलट सकता है। इस मामले में सक्रिय रहे भाजपा सांसद सुब्रह्मण्यम स्वामी ने सरकार को सलाह देते हुए ऊपरी अदालत में अपील करने को कहा है। उन्होंने जयललिता केस का उदाहरण दिया है।

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क्या था जय​ललिता केस
जयललिता केस की बात करें तो उच्च न्यायालय ने बेंगलुरू की विशेष अदालत के 2014 के उस फैसले को पलट दिया था जिसमें जयललिता को दोषी ठहराते हुए उन्हें चार साल की सजा और 100 करोड़ रुपये का जुर्माना लगाया था। जयललिता, शशिकला और उनके रिश्तदारों वी एन सुधाकरन और इलावरसी पर आरोप था कि 1991 से 1996 के बीच जयललिता के मुख्यमंत्री कार्यकाल के दौरान कथित तौर पर 66.65 करोड़ रूपये की आय से अधिक सम्पत्ति जुटाई। निचली अदालत ने उन्हें भी दोषी ठहराया और चार वर्ष की सजा सुनाने के साथ ही करोड़ों रुपये का जुर्माना लगाया। जयललिता पर सरकारी पूंजी के गबन, गैर कानूनी ढंग से भूमि अधिग्रहण और आय से अधिक संपत्ति अर्जित करने के आरोप लगे थे। उन्हें आय से अधिक संपत्ति के एक मामले में 27 सितम्बर 2014 को सजा भी हुई और मुख्यमंत्री पद छोडऩा पड़ा परंतु कर्नाटक हाईकोर्ट ने 11 मई 2015 को बरी कर दिया। जिसके बाद वह फिर से तमिलनाडु की मुख्यमंत्री बन गईं।

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तो यहां भी पलट सकता है मामला?
2G घोटाले के फैसले को विशेष अदालत में चैलेंज किया जाता है और अगर उन सुबूतों को पेश किया जाता है जिनके अभाव में राजा समेत अन्य आरोपियों को छोड़ा गया तो आरोपी तो फंसेंगे ही वहीं कांग्रेस भी बैकफुट पर आ जाएगी।

2G  घोटाले में ईडी ने अपने आरोप पत्र में द्रमुक सुप्रीमो करुणानिधि की पत्नी दयालुअम्मल को भी आरोपी बनाया था, जिन पर एसटीपीएल के जरिये 200 करोड़ रुपये का भुगतान करने और उसे द्रमुक के चैनल कलैंगर टीवी में लगाने का आरोप है। अंतिम रिपोर्ट में ईडी ने 10 व्यक्तियों और नौ कंपनियों को मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट के तहत आरोपी बनाया था। कलैंगर टीवी के अलावा एसटीपीएल (अब एतिसलात डीबी टेलीकॉम प्राइवेट लिमिटेड), कुसेगांव रियल्टी, सिनेयुग मीडिया एंड इंटरटेनमेंट, डायनैमिक्स रियल्टी, एवरस्माइल कंस्ट्रक्शन कंपनी, कैनवुड कंस्ट्रक्शन एंड डेवलपर्स, डीबी रियल्टी और मिस्टीकल कंस्ट्रक्शन को आरोपी बनाया था।

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