वर्ष 2018 में इन राशियों पर रहेगी शनि की साढ़ेसाती और ढैय्या, जानें उपाय

 शनि सौरमण्डल के सबसे धीमी गति से चलने वाला ग्रह हैं। यह एक राशि से दूसरी राशि में गोचर करने में ढाई वर्ष का समय लेते हैं। गोचर करता हुए शनि जिस राशि में स्थित होते हैं, वह राशि एवं उससे दूसरी राशि और 12वीं राशि वाले जातक साढ़े साती के प्रभाव में होते हैं। साल 2018 में वृश्चिक (अंतिम चरण), धनु (द्वितीय चरण) और मकर राशि में (प्रथम चरण) की साढ़े साती शुरू होगी।

इसी प्रकार शनि स्थित राशि से चतुर्थ व अष्टम राशि वाले जातक ढैय्या से प्रभावित होते हैं। वर्ष 2018 में वृष व कन्या राशि के जातक ढैय्या से पीड़ित रहेंगे। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार शनि एक पापी ग्रह है, जो जातक की कुंडली में अशुभ होते ही उसे नुकसान पहुंचाता है।

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शनिदेव को ‘कर्मफल दाता’ माना गया है, मनुष्य जो भी कर्म करेगा उसका भुगतान शनिदेव उससे करवाते हैं।इसलिए हर किसी को शनि से डरने की जरूरत नहीं है। जिन जातकों की कुंडली में शनि उच्चराशिस्थ, राजयोगकारक एवं शुभ होते हैं उनके लिए साढ़ेसाती की अवधि में काफी शुभफल मिलते हैं और इस दौरान वे काफी उन्नति भी करते हैं।

साढ़े सात साल की साढ़ेसाती और ढाई साल की ढैय्या के वक्त में शनिदेव जातक को उसके कर्मों का फल देना आरंभ कर देते हैं। यदि आपके काम रुकने लगते हैं, सफलता नहीं मिल रही है, तो जान लें कि शनिदेव आपको पीड़ित कर रहे हैं। ऐसे में शनिदेव को प्रसन्न करने के उपाय करके जातक नुकसान और परेशानियों को कम कर सकते हैं।

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शनि पीड़ा से बचने के उपाय

यदि शनि से पीड़ित हैं, तो सबसे पहला उपाय है शनि बीज मंत्र ‘ॐ प्रां प्रीं प्रौं सः शनैश्चराय नमः’ का रोजाना 108 बार जाप करें। इसके अलावा काले घोड़े की नाल अथवा नाव की कील से बनी हुई अंगूठी को धारण करना। यह छल्ला या अंगूठी दाएं हाथ की मध्यमा अंगुली में शनिवार के दिन प्रातः शनि बीज मंत्र की 108 बार स्तुति के बाद ही पहनें।

ध्यान रहे कि उस अंगूठी को शुक्रवार की रात में सरसो के तेल में डुबो कर रख दें और धारण करने के बाद उस तेल का दीपक जला दें। यह पूरा तेल जल जाना चाहिए। इससे जरूर लाभ होता है।

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तीसरा उपाय है कि आप हनुमानजी की शरण में जाएं। जिन पर हनुमान की कृपा होती है, शनिदेव उन्हें कष्ट नहीं देते हैं। कम से कम 45 दिनों तक रोज हनुमान चालीसा का पाठ करें, शनि की साढ़ेसाती, ढैय्या, दशा, अंतर्दशा सभी के बुरे प्रभाव से छुटकारा मिलेगा।

हनुमान चालीसा के अलावा सुंदर काण्ड का पाठ भी कर सकते हैं। शनि प्रकोप से मुक्ति के लिए शिव स्तोत्र का पाठ भी किया जाता है।

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