LIVE: गुजरात चुनाव में 105 सीटों पर BJP और 74 पर कांग्रेस अन्य 2 आगे

अहमदाबाद.गुजरात विधानसभा चुनाव के नतीजे सोमवार को आ रहे हैं। रुझानों में 94 सीटों पर बीजेपी और कांग्रेस 84 सीट पर आगे चल रही है। ये चुनाव बीजेपी के नरेंद्र मोदी, अमित शाह और कांग्रेस के राहुल गांधी के लिए बेहद अहम है। बीजेपी ने 150+ सीटें जीतने का टारगेट रखा है। वहीं, कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी 22 साल बाद राज्य में कांग्रेस की वापसी की उम्मीद कर रहे हैं। अगर दोनों पार्टियों के वोट शेयर और सीटों को देखा जाए तो अब तक कांग्रेस को 1985 में सबसे ज्यादा 149 सीटें (55.6%) मिली थीं। उधर, बीजेपी के खाते में 2002 में 49.9% वोट शेयर के साथ पहली बार सबसे ज्यादा 127 सीटें आई थीं।

अपडेट्स

9:45 AM: सीएम विजय रूपाणी तीसरे राउंड की काउंटिंग के बाद 7600 वोट से आगे चल रहे हैं।

9:35 AM: EC के आधिकारिक आंकड़े के मुताबिक गुजरात में बीजेपी 56 और कांग्रेस 50 सीटों पर लीड कर रही है।
9:30 AM: सीएम विजय रूपाणी राजकोट वेस्ट सीट पर 1800 वोट से आगे चल रहे हैं।
9:25 AM:बीजेपी नेता जीतू वाघाणी भावनगर वेस्ट सीट से 2200 वोट से आगे चल रहे हैं।

9:20 AM: सेंसेक्स में 600 प्वॉइंट्स की गिरावट आई।

9:15 AM: इलेक्शन कमीशन के ऑफिशियल ट्रेंड के मुताबिक बीजेपी 37 और कांग्रेस 30 सीटों पर आगे चल रही है।

9:10 AM: पोरबंदर से कांग्रेस नेता अर्जुन मोढवाडिया आगे चल रहे हैं।

8:50 AM: हिमाचल और गुजरात में काउंटिंग जारी है। उत्तप्रदेश के वाराणसी में जीत के लिए बीजेपी वर्कर्स ने हवन किया।

8:45 AM: कांग्रेस शक्तिसिंह गोहिल मांडवी से 1300 से वोट से आगे चल रहे हैं।
8:40 AM: नितिन पटेल आगे चल रहे हैं।
8:30 AM:विजय रुपाणी राजकोट से पीछे चल रहे हैं।
8:20 AM: पोरबंदर और भावनगर ईस्ट सीट पर बीजेपी आगे। कांग्रेस 2 सीट मांडवी और नाडियाड पर आगे चल रहे हैं।

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7:50 AM: राहुल गांधी के घर के बाहर हवन किया गया।

1) किसने चुनी सरकार?

– इस बार गुजरात की 182 सीटों पर लड़ रहे 1828 उम्मीदवारों को चुनने के लिए करीब 4.35 करोड़ वोटर्स थे।

– 2012 में चुनाव लड़ चुके 121 विधायक इस बार फिर मैदान में थे। दो फेज में कुल 67.75% वोटिंग हुई। यह पिछले चुनाव से 3.55% कम है। 2012 में 182 सीटों पर 71.30% वोटिंग हुई थी।

2) इस बार गुजरात चुनाव पर नजर क्यों?

नरेंद्र मोदी: गुजरात में 19 साल से BJP सत्ता में है, लेकिन 15 साल में पहली बार मोदी सीएम कैंडिडेट नहीं हैं। 1998 में बीजेपी की जीत के बाद केशुभाई पटेल को मुख्यमंत्री बनाया गया था। 2001 में उनके हटने के बाद मोदी को सीएम बनाया गया। मोदी की अगुआई में बीजेपी ने 2002, 2007 और 2012 में विधानसभा चुनाव लड़ा और जीता। अगर वह फिर जीतती है तो नोटबंदी और जीएसटी जैसे फैसलों पर मुहर लग जाएगी, क्योंकि जीएसटी का सबसे ज्यादा विरोध गुजरात में हुआ था।

अमित शाह: जुलाई 2014 में बीजेपी के अध्यक्ष बने थे। इस रोल में गुजरात में उनका पहला चुनाव है। हालांकि, अभी तक अमित शाह की लीडरशिप में 3 साल में 11 राज्य में बीजेपी सरकार बनाने में कामयाब हुई है। वहीं, 3 राज्यों में हार मिली है।

राहुल गांधी: गुजरात के चुनाव नतीजों से राहुल का राजनीतिक भविष्य तय होगा। कांग्रेस जीत जाती है तो बतौर पार्टी अध्यक्ष गुजरात चुनाव उनकी पहली कामयाबी होगी। राहुल को 2019 के चुनाव में मोदी को टक्कर देने के लिए एक मजबूत प्लेटफार्म मिल जाएगा। वे जनवरी 2013 में कांग्रेस के वाइस प्रेसिडेंट बने। बतौर कांग्रेस उपाध्यक्ष उनका चुनावी परफॉर्मेंस बेहद खराब रहा है। इस दौरान उनकी पार्टी को 5 साल में 27 राज्यों में हार, 9 में जीत मिली। अब वे कांग्रेस अध्यक्ष बन गए हैं। अगर वे गुजरात और हिमाचल का चुनाव हार जाते हैं तो यह पार्टी और वर्कर्स के मनोबल को तोड़ सकता है।

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हार्दिक पटेल: पाटीदार अब तक बीजेपी को सपोर्ट करते आए थे। लेकिन, 2017 के चुनाव में पाटीदार आंदोलन के लीडर हार्दिक पटेल खुलकर कांग्रेस के साथ आ गए। हार्दिक पटेल ने 2015 में आरक्षण आंदोलन छेड़ा था। हार्दिक ने पटेलों के असर वाले इलाकों, खासकर सौराष्ट्र और सूरत में 120 से ज्यादा रैलियां की थीं।

जिग्नेश मेवाणी:दलित नेता जिग्नेश मेवाणी बनासकांठा के वडगाम से निर्दलीय कैंडिडेट के तौर पर चुनाव लड़ रहे हैं। पिछले साल ऊना में चार दलितों को कथित गोरक्षकों ने पीटा था। इसके बाद जिग्नेश ने पूरे राज्य में पदयात्रा की थी और दलितों को एकजुट किया था।

अल्पेश ठाकुर:अल्पेश OBC लीडर हैं। उनकी इस कम्युनिटी में अच्छी पकड़ है। वे 23 अक्टूबर को कांग्रेस में शामिल हुए। उन्होंने राधनपुर से चुनाव लड़ा।

3) पिछले चुनावों में क्या रहे नतीजे?

2017 के नतीजे/रुझान 2012 के नतीजे वोट शेयर 2014 लोकसभा ( कुल सभी सीटें) वोट शेयर असेंबली सीटों पर बढ़त
बीजेपी 00 115 47.9% 26 60.1% 162
कांग्रेस 00 61 38.9% 00 33.5% 17

4) बीजेपी-कांग्रेस को कब कितनी सीटें मिलीं

साल बीजेपी कांग्रेस
1995 121 45
1998 117 53
2002 127 51
2007 117 59
2012 115 61

4 ) बीजेपी-कांग्रेस का वोट शेयर

साल बीजेपी कांग्रेस अंतर
1995 42.51% 32.86% 9.65%
1998 44.81% 34.85% 9.96%
2002 49.85% 93.28% 10.57%
2007 49.12% 38.00% 11.12%
2012 47.85% 38.93% 8.92%

6) BJP को रिकॉर्ड जीत कैसे मिल सकती है?

– 2014 में बीजेपी को गुजरात की सभी 26 लोकसभा सीटों पर जीत हासिल हुई। विधानसभा क्षेत्रवार 162 सीटों पर बढ़त मिली थी। यानी 2012 में मिली 115 विधानसभा सीटों से 47 ज्यादा।

– 2014 के लोकसभा चुनाव में बीजेपी को गुजरात में 60% वोट मिले। अगर यही परफॉर्मेंस बीजेपी 2017 में दोहरा दे तो 150 सीटों का टारगेट हासिल कर सकती है।

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7) कांग्रेस की जीत के आसार क्या हैं?

– 2012 में 20% पाटीदार वोटरों में से 80% ने बीजेपी को सपोर्ट किया था। अगर ये वोटर इस बार कांग्रेस की तरफ झुक जाते हैं तो बीजेपी को बड़ा नुकसान हो सकता है।

8) गुजरात में क्या है कास्ट फैक्टर?

कम्युनिटी वोट शेयर
पाटीदार 20%
मुस्लिम 9%
पाटीदार+मुस्लिम 29%
सवर्ण 20%
ओबीसी 30%
केएचए: क्षत्रिय, हरिजन आदिवासी 21%
सवर्ण+ओबीसी+केएचए 71%

9) बीजेपी ने 53 तो कांग्रेस ने 47 पाटीदार मैदान में उतारे

जाति बीजेपी कांग्रेस
पाटीदार 53 47
ओबीसी 47 60
सवर्ण 42 22
आदिवासी 27 27
दलित 13 20

– बीजेपी ने गुजरात की सभी 182 सीटों पर चुनाव लड़ा। वहीं, कांग्रेस ने 179 सीटों पर कैंडिडेट्स खड़े किए। उसने दो सीटें सहयोगी भारतीय ट्रायबल पार्टी (बीटीपी) के लिए छोड़ीं। वहीं, बनासकांठा सीट पर उसने निर्दलीय उम्मीदवार जिग्नेश मेवाणी का सपोर्ट किया है। बीजेपी ने 12 तो कांग्रेस ने 10 महिलाओं को टिकट दिया।

10) पाटीदार अहम क्यों?

पाटीदार वोटर कितने हैं 20%
20% पाटीदारों में लेउवा कितने 60%
20% पाटीदारों में कड़वा कितने 40%
2012 में BJP को कितने पाटीदार वोट मिले 80%
बीजेपी के पास कितने पाटीदार विधायक 182 में से 44
अहम क्यों? 19 साल से बीजेपी को सत्ता में रखने में भूमिका

11) मोदी-राहुल ने जमकर किया प्रचार, ये मुद्दे गरमाए
– मोदी की 36 जगहों पर रैलियां हुईं। राहुल ने 57 जगहों पर रैलियां कीं। साथ ही नवसृजन यात्रा भी निकाली।

– आठ बार राहुल गांधी गुजरात आए। मोदी ने सात बार गुजरात दौरा कर प्रचार किया।

– चुनाव कैम्पेन के दौरान राहुल 27 बार और मोदी 5 बार मंदिर गए।
– पहले 60 दिनों के 4 बड़े मुद्दे थे जीएसटी, नोटबंदी, गुजरात में विकास और आरक्षण। आखिरी 11 दिनों के 4 बड़े मुद्दे- हिंदुत्व, मंदिर, गुजराती अस्मिता और पाकिस्तान रहे। इन पर विवाद भी हुआ।

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