ऐसा था राहुल का राजनीतिक सफर, जीवन से जुड़े कुछ खास पहलू

नई दिल्ली: कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी देश की सबसे पुरानी राजनीतिक पार्टी की बागडोर संभालने वाले नेहरू-गांधी परिवार के छठे सदस्य हैं।

पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी और 19 वर्ष तक कांग्रेस अध्यक्ष रही सोनिया गांधी के पुत्र राहुल गांधी को 2013 में पार्टी उपाध्यक्ष बनाया गया था और तब से वह पार्टी के बड़े फैसले लेने में प्रमुख भूमिका निभा रहे थे।
10 जून, 1970 को नई दिल्ली में जन्मे राहुल की प्रारंभिक शिक्षा यहां के सेंट कोलम्बस स्कूल से हुई और बाद में वह दून स्कूल चले गए। अमेरिका में हावर्ड विश्वविद्यालय के रोलिंस कॉलेज फ्लोरिडा से 1994 में कला स्नातक उपाधि हासिल करने के बाद राहुल ने 1995 में लंदन के मशहूर कैम्ब्रिज विश्वविद्यालय के ट्रिनिटी कॉलेज से एम.फिल किया।

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स्नातक की पढ़ाई के बाद उन्होंने माइकल पोर्टर की प्रबंधन परामर्श कंपनी मॉनीटर ग्रुप के साथ तीन साल तक काम किया। इस दौरान कंपनी और उनके सहकर्मियों को पता नहीं था कि वह भारत के एक बड़े राजनीतिक परिवार से हैं।

वर्ष 2002 के अंत में वह मुंबई में प्रौद्योगिकी से संबंधित आउटसोर्सिंग कंपनी बैकअप्स सर्विसेस प्राइवेट लिमिटेड के निदेशक-मंडल के सदस्य बने। कांग्रेस अध्यक्ष ने 2004 में राजनीति में प्रवेश किया और अपने पिता के चुनाव क्षेत्र उत्तर प्रदेश के अमेठी से लोकसभा चुनाव जीते। उन्हें 24 सितंबर, 2007 को कांग्रेस का महासचिव नियुक्त किया गया। उन्होंने पार्टी को जमीनी स्तर पर फिर से सक्रिय करने और पार्टी के सहयोगी संगठनों में आंतरिक लोकतंत्र पर जोर दिया।

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वर्ष 2009 के आम चुनावों में कांग्रेस को मिली बड़ी जीत का श्रेय उन्हें भी दिया गया। इससे पहले नेहरू गांधी परिवार के मोतीलाल नेहरू, पूर्व प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू, पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी और राजीव गांधी कांग्रेस अध्यक्ष के पद पर रहे हैं। राहुल गांधी की मां सोनिया गांधी 1998 में कांग्रेस अध्यक्ष बनी थी और इस पद पर सबसे अधिक समय तक रही।

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