अब मीसा बंदी कहे जाएंगे लोकतंत्र रक्षक

जयपुर। आपातकाल के दौरान जेल गए मीसा (आंतरिक सुरक्षा कानून) बंदियों को राजस्थान में अब ‘लोकतंत्र रक्षक’ के नाम से जाना जाएगा। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) नेतृत्व पिछले कई महीने से सरकार पर इसके लिए दबाव बनाए हुए था।

बुधवार को अपना चार साल का कार्यकाल पूरा करने जा रही वसुंधरा सरकार ने मंगलवार को हुई मंत्रिमंडल की बैठक में इस पर मुहर लगा दी। मीसा बंदियों को पहले की तरह 12 हजार रुपये मासिक पेंशन मिलती रहेगी। जनवरी के अंत तक दो लोकसभा सीटों और एक विधानसभा सीट पर उप चुनाव होना है।

अगले साल विधानसभा के चुनाव भी हैं। ऐसे में सरकार आरएसएस की नाराजगी मोल नहीं लेना चाहती। मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे की अध्यक्षता में मंगलवार को हुई मंत्रिमंडल की बैठक में संघ की नाराजगी दूर करने पर चर्चा हुई। इसके बाद मीसा बंदियों का नाम बदलने की आरएसएस की मांग पर मुहर लगा दी।

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इस बैठक में मंत्रियों ने स्वयंसेवकों का सहयोग बढ़ाने को लेकर अपनी बात रखी। नियमित रूप से संघ के प्रचारकों के साथ मंत्रियों के संवाद पर भी सहमति बनी। गुर्जर समेत पांच जातियों को पहले से ओबीसी में मिल रहे आरक्षण के साथ ही अलग से एक प्रतिशत आरक्षण देने पर भी विचार हुआ।

प्रदेश के संसदीय कार्यमंत्री राजेंद्र राठौड़ ने बताया कि सरकार की चौथी वर्षगांठ के उपलक्ष्य में बुधवार को जिला मुख्यालयों पर समारोह होंगे। मुख्य समारोह 18 दिसंबर को जयपुर में होगा।

गिनाने को कोई उपलब्धि नहीं : कांग्रेस-

प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष सचिन पायलट ने वसुंधरा सरकार को आजादी के बाद की सबसे विफल सरकार बताते हुए कहा कि प्रदेश में कोई काम नहीं हुआ। सरकार के पास उपलब्धि के नाम पर गिनाने को कुछ भी नहीं है।

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