एआरटीओ की नियुक्तियां अटकी, कैबिनेट ने बैरंग लौटाया प्रस्ताव

भोपाल। 13 सहायक क्षेत्रीय परिवहन अधिकारियों (एआरटीओ) की नियुक्तियों का रास्ता निकालने परिवहन विभाग द्वारा कैबिनेट में रखा प्रस्ताव बैरंग वापस लौटा दिया गया। विभाग ने इन्हें पदोन्न्ति के पदों के विरुद्ध नियुक्त करने या सीधी भर्ती के पद न होने से चयनित उम्मीदवारों को नियुक्ति न देने का प्रस्ताव रखा था। बैठक में प्रस्ताव आते ही मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि इस पर बाद में विचार किया जाएगा। इसी तरह मांझी जाति के प्रमाण-पत्र बनाकर धीमर, कहार, भोई, केवट, मल्लाह और निषाद जाति के व्यक्तियों द्वारा सरकारी नौकरी और शैक्षणिक संस्थाओं में प्रवेश लेने वालों को सरंक्षण देने का फैसला लिया गया। हालांकि इन्हें आरक्षण का लाभ नहीं मिलेगा।

मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान की अध्यक्षता में मंगलवार को हुई कैबिनेट के फैसलों की जानकारी देने हुए जनसंपर्क मंत्री डॉ. नरोत्तम मिश्रा ने बताया कि मांझी जनजाति का प्रमाण-पत्र बनाकर नौकरी और शैक्षणिक संस्थाओं में प्रवेश करने वालों को संरक्षण देने का प्रस्ताव पारित कर दिया गया है।

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सूत्रों के मुताबिक भाजपा विधायक मोती कश्यप ने मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर कहा था कि 11 नवंबर 2005 के पहले धीमर, कहार, भोई, केवट, मल्लाह और निषाद जाति के जिन व्यक्तियों ने नौकरी या शैक्षणिक संस्थाओं में प्रवेश ले लिया था, उन्हें संरक्षण दिया जाए। इन व्यक्तियों को आरक्षण का लाभ तब तक नहीं दिया जाएगा, जब तक कि संवैधानिक रूप से इनको लेकर अंतिम फैसला नहीं हो जाता है। उल्लेखनीय है कि ये सभी जातियां कई विधानसभा क्षेत्रों में अच्छा खासा दखल भी रखती हैं।

इसके अलावा मंत्रालय विस्तार परियोजना से जुड़े दो प्रस्ताव बैठक में रखे गए, जिन्हें मंजूरी मिल गई। इन प्रस्तावों के तहत अब मंत्रालय एनेक्सी की लागत लगभग पांच सौ करोड़ रुपए हो गई है। साथ ही नए भवन में फर्नीचर नया ही लगाया जाएगा। पहले यह विचार था कि मौजूदा भवन से नए भवन में स्थानांतरित होने पर पुराना फर्नीचर वहां लगा दिया जाए।

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मुख्यमंत्री ने इससे असहमति जाहिर करते हुए पूरा नया फर्नीचर लगाने के निर्देश दिए हैं। इस पर करीब 41 करोड़ रुपए का खर्च आएगा। इसके अलावा आंतरिक साज-सज्जा, विधानसभा से मंत्रालय तक सड़क का निर्माण, मुख्यमंत्री सुरक्षा के उपकरण सहित अन्य कार्यों के लिए 131 करोड़ रुपए की मंजूरी भी दी गई।

कागजों पर जिंदा योजनाओं को बंद करो

बैठक में तिलहन फसलों की विकास की योजनाओं का प्रस्ताव आने पर मुख्यमंत्री ने कहा कि छोटी-छोटी ये योजनाएं अनुपयोगी हो चुकी हैं। ये सिर्फ कागजों पर चल रही हैं। इनकी प्रासंगिकता समाप्त हो चुकी है। इन्हें बंद करके इनकी राशि का उपयोग दूसरी योजनाओं में कर किसानों को लाभांवित किया जाए। चर्चा के बाद प्रस्ताव को वापस लौटा दिया गया।

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आठ लाख किसानों को बंटेगा 880 करोड़ रुपए का भावांतर

अनौपचारिक बैठक में मुख्यमंत्री ने सभी मंत्रियों को भावांतर भुगतान योजना के बारे में जानकारी दी। उन्होंने बताया कि नवंबर में योजना के तहत जो फसल बिकी है, उसका भावांतर भुगतान 25 से 30 दिसंबर के बीच किया जाएगा। सभी मंत्री प्रभार या गृह जिले में इस दौरान जाएं और भावांतर भुगतान के कार्यक्रम करें।

बिजली कंपनियों के कर्ज की गारंटी लेगी सरकार

कैबिनेट में तय किया गया कि बिजली कंपनियों ने लघु अवधि के लिए पॉवर फाइनेंस कॉर्पोरेशन से लिए जाने वाले डेढ़ हजार करोड़ रुपए के कर्ज की गारंटी राज्य शासन लेगा। बिजली कंपनियों को इसके एवज में एक की जगह आधा प्रतिशत गारंटी फीस प्रतिवर्ष देंगी। पिछले साल भी कंपनियों ने जो कर्ज लिया था, उसमें भी गारंटी फीस आधा प्रतिशत ही रखी गई थी।

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