देवियों-सज्जनों, कृपया मजबूती से बैठ जाएं : यशवंत सिन्हा के लेख पर राहुल का तंज

कांग्रेस ने भाजपा नेता यशवंत सिन्हा के ‘‘अर्थव्यवस्था की वित्त मंत्री द्वारा की गयी दुर्दशा’’ को लेकर अरूण जेटली की आलोचना किये जाने के बाद आज देश के आर्थिक हालात को लेकर केन्द्र सरकार पर निशाना साधा। यशवंत सिन्हा ने ‘‘मुझे अब बोलना चाहिए’’ शीर्षक आलेख में अर्थव्यवस्था को लेकर वित्त मंत्री अरूण जेटली पर हमला बोला है। कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी ने जेटली को निशाने पर लेते हुए कहा कि लोगों को अपना रूख स्पष्ट करना चाहिए क्योंकि ‘‘हमारे जहाज के पंख गिर गये हैं।’’ राहुल ने ट्वीट किया, ‘‘देवियों एवं सज्जनों, यह आपका सह पायलट एवं वित्त मंत्री बोल रहा है। कृपया अपनी पेटी बांध लें और मजबूती से बैठ जाएं। हमारे जहाज के पंख गिर गये हैं।’’ पूर्व वित्त मंत्री पी चिदंबरम ने सवाल किया कि क्या ‘‘सत्ता’’ इस सत्य को स्वीकार करेगा।
चिदंबरम ने ट्विटर पर कहा, ‘‘यशवंत सिन्हा ने सत्ता से सत्य कहा है। क्या सत्ता अब इस सत्य को स्वीकार करेगी अर्थव्यवस्था डूब रही है।’’ उन्होंने सिन्हा का हवाला देते हुए कहा कि सत्य यह है कि 5.7 प्रतिशत की विकास दर वास्तव में 3.7 प्रतिशत या उससे भी कम है। उन्होंने कहा, ‘‘लोगों के मन में भय बैठा देना ही नये खेल का नाम है।’’चिदंबरम ने कहा, ‘‘शाश्वत सत्य : सत्ता क्या करती है, इसका महत्व नहीं है। अंतत: सत्य की जीत होगी।’’ यशवंत सिन्हा अटल बिहारी वाजपेयी नीत राजग सरकार में वित्त मंत्री थे। उन्होंने अपने आलेख में कहा है कि अगर वह नहीं बोलते तो उनका राष्ट्रीय दायित्व पूरा नहीं होता।

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बता दें कि भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता और पूर्व वित्त मंत्री यशवंत सिन्हा ने मौजूदा वित्तमंत्री अरुण जेटली पर भारतीय अर्थव्यवस्था की हालत बिगाड़ने और इसके बाद उत्पन्न ‘आर्थिक सुस्ती’ से कई सेक्टरों की हालत खस्ता होने के लिए निशाना साधा है।  इंडियन एक्सप्रेस के संपादकीय पृष्ठ पर प्रकाशित लेख में सिन्हा ने कहा है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी दावा करते हैं कि उन्होंने बहुत करीब से गरीबी को देखा है और उनके वित्तमंत्री भी सभी भारतीयों को गरीबी करीब से दिखाने के लिए काफी मेहनत कर रहे हैं। सिन्हा ने कहा है जेटली अपने पूर्व के वित्त मंत्रियों के मुकाबले बहुत भाग्यशाली रहे हैं। उन्होंने वित्त मंत्रालय की बागडोर उस समय हाथों में ली, जब वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल कीमत में कमी के कारण उनके पास लाखों-करोड़ों रुपये की धनराशि थी। लेकिन उन्होंने तेल से मिले लाभ को गंवा दिया। उन्होंने कहा कि विरासत में मिली समस्याएं, जैसे बैंकों के एनपीए और रुकी परियोजनाएं निश्चित ही उनके सामने थीं, लेकिन इससे सही ढंग से निपटना चाहिए था। विरासत में मिली समस्या को न सिर्फ बढ़ने दिया गया, बल्कि यह अब और खराब हो गई है।वाजपेयी सरकार में वित्तमंत्री रहे सिन्हा ने कहा कि गिरती अर्थव्यवस्था में नोटबंदी ने आग में घी डालने का और बुरी तरह लागू किए गए जीएसटी से उद्योग को भारी नुकसान पहुंचा है और कई इस वजह से बर्बाद हो गए हैं।

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