जातिगत समीकरण बिगाड़ सकते है टिकट का गणित

जबलपुर, अजय पाण्डे। विधानसभा चुनाव 2018 के आखरी में होना है , लेकिन उसको लेकर राजनैतिक तैयारियां तेज होती जा रही है। इसके साथ ही टिकट के दावेदार भी सामने आ रहे है। जबकि कांग्रेस लंबे समय से सत्ता के बाहर है, ऐसे में सत्ता के लिए लालसा भी उसमें ज्यादा है, तो दावेदार भी थोड़ा जल्दी और ज्यादा आक्रामकता के साथ सामने आ रहे है।

दोवदार टिकट के – कांग्रेस
6 सीटों पर एक दर्जन ब्राम्हणों की नजर

यह बात तो जगजाहिर है, कि हिन्दुस्तान में चुनाव विकास के साथ शुरू होकर अपनी परिणीती तक पहुंचते-पहुंचते जाति धर्म और क्षेत्र को भी साथ ले लेते है। ऐसे में जबलपुर की 8 विधानसभा सीटों के जातिगत समीकरणों को देखे तो कांग्रेस की ओर से सबसे ज्यादा ब्राम्हण दावेदार सामने आ रहे है।
ये है समीकरण
जबलपुर जिले की 8 विधानसभा सीटों में से 1 अनुसूचित जाति तथा 1 अनुसूचित जनजाति के लिए आरक्षित है शेष बची 6 सीट। यदि कांग्रेस के हिसाब से समझे तो इन 6 सीटों में से दो सीट पर कांग्रेस के विधायक है, वो भी ब्राम्हण। शेष बची विधानसभा की सीटों पर ज्यादातर में ब्राम्हण ही मजबूती के साथ दावेदारी ठोक रहे है। ऐसे में सवाल उठता है कि कांग्रेस कितने जनेऊ धारियों को मैदान में उतारेगीं।
ये है दावेदार
यदि मध्य विधानसभा की बात की जाये तो सबसे ज्यादा दावेदार कांग्रेस की ओर से यहीं है जिनमें प्रमुखता से ब्राम्हण चेहरे ही सामने आ रहे है। अमरीश मिश्रा हो या सौरभ शर्मा या फिर शशांक इनके अलावा और भी ब्राम्हण कोशिश करते दिख रहे है। केन्ट विधानसभा से आलोक मिश्रा ने प्री-इलेक्शन कैंपेन ही प्रारंभ कर दी है। पश्चिम से पहले ही एक ब्राम्हण विधायक है। यदि ग्रामीण सीटों को देखे तो यहां कि तीन अनारक्षित सीटों में एक विधायक पाटन से ब्राम्हण जाति से है। बरगी में जितेन्द्र अवस्थी पूर्ण सक्रियता दिखा रहे है, तो बबुआ शुक्ला भी भीतरखांने तैयारी कर रहे है। पनागर से वीरेन्द्र चौबे और राधेश्याम चौबे भी कोई न कोई जुगत भिड़ा ही रहे है।
इसे भी समझे
जबकि दो विधायक ब्राम्हण है तो तीसरे और चौथे के लिए जगह बनाना मुश्किल हो जायेगा। चुनावों में भी समय को मौका देना पड़ता है यदि अन्य जातियों के गणित को देखे तो जबलपुर ग्रामीण की सीटों पर पटेल और लोधी वोट ब्राम्हणों के साथ निर्णायक भूमिका में रहते है। इनकों किसी एक क्षेत्र में प्रतिनिधित्व मिलता है तो उसका फायदा पार्टी को बाकी सीटों पर मिलेगा। इस बात को नजर अंदाज नहीं किया जा सकता है। शहरी क्षेत्र में भाजपा के हिसाब से तो अपर क्लास हमेशा फासदे मंद रहा है, लेकिन इसकों साधने के लिए कांग्रेस को ओबीसी, दलित और माईनोरिटी को मिलाकर सोशल इंजीनियरिंग का फार्मूला तैयार करना होगा।
फैक्ट फाईल
विधानसभा
कुल सीट – 8
सामान्य सीट – 6
अनुसूचित जाति – 1
अनुसूचित जनजाति – 1

जल्द ही सुलझ सकता है भण्डारण विवाद
खाद्य मंत्री व पीएस ने दिया निराकरण का आश्वासन
जबलपुर नगर प्रतिनिधि। न्यूनतम समर्थन मूल्य पर हो रही धान की खरीदी पर छाये बादल छटनें के आसार दिखने लगे है। विपणन संघ और वेयर हाउस संचालकों के बीच चल रहा विवाद आने वाले एक-दो दिनों में खत्म होते दिख रहा है। धान की घटौती के मुद्दे पर लाम बंद हुये वेयर हाउस संचालकों को सफलता मिलते दिख रही है। अपनी मांगो को लेकर वेयर हाउस एसोसिएशन के एक प्रतिनिधि मण्डल ने खाद्य मंत्री ओम प्रकाश धुर्वे और खाद्य विभाग की प्रमुख सचिव नीलम समी राव से मुलाकात की थी। दोनों ही लोगों ने विषय को गंभीरता से लेते हुए इस पर एक या दो दिन में निर्णय लेने का आश्वासन दिया है। यदि जल्द निर्णण होता है तो धान के भंडारण को लेकर जो समस्या खड़ी हो रही है। उसका निराकरण हो जायेगा और धान खरीदी में तेजी आयेगी जिसका फायदा कहीं न कहीं किसानों को मिलेगा।

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