बीजेपी की संयुक्ता भाटिया बनीं लखनऊ की पहली महिला मेयर

देश को पहली महिला राज्यपाल और पहली महिला मुख्यमंत्री देने का गौरव उत्तर प्रदेश को हासिल है. इसी क्रम में अब यूपी की राजधानी लखनऊ को पहली महिला मेयर मिल गई है. उत्तर प्रदेश नगर निकाय चुनाव में बीजेपी की संयुक्ता भाटिया ने ये उपलब्धि हासिल की.

दरअसल राजधानी में नगर निगम चुनावों में 100 साल में लखनऊ की मेयर कोई महिला नहीं बनी थी. इस बार लखनऊ मेयर की सीट महिला के लिए आरक्षित थी. वैसे तो ये सीट बीजेपी की परंपरागत सीटों मे से एक मानी जाती रही है लेकिन ​सपा और बसपा द्वारा सिंबल पर चुनाव लड़ने के ऐलान के बाद मुकाबला दिलचस्प हो गया था.

यहां 1320 बूथों पर करीब 5 लाख 80 हजार 64 मतों में से बीजेपी की संयुक्ता भाटिया ने 2 लाख 43 हजार 169 वोट हासिल किए. वहीं सपा की मीरावर्धन दूसरे स्थान पर रहीं. मीरा वर्धन को 1 लाख 58 हजार 974 वोट मिले. इनके अलावा कांग्रेस की प्रेमा अवस्थी 70 हजार 753 मत के साथ तीसरे स्थन पर रहीं, जबकि बसपा की बुलबुल गोदियाल 53 हजार 258 वोट के साथ चौथे स्थान पर रहीं.

बता दें कि सरोजिनी नायडू ‘यूनाइटेड प्राविंस’ (अब उत्तर प्रदेश) की पहली राज्यपाल थीं. वह 15 अगस्त 1947 से दो मार्च 1949 तक राज्यपाल रहीं. सरोजिनी नायडू, जो भारत कोकिला के नाम से मशहूर थीं, स्वतंत्रता सेनानी थीं. वह 13 फरवरी 1879 को हैदराबाद में एक बंगाली परिवार में पैदा हुई थीं.

उनकी शिक्षा चेन्नई, लंदन और कैम्ब्रिज में हुई. वह महात्मा गांधी की अनुयायी बनीं और भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस की अध्यक्ष भी रहीं. उनकी कविताओं के संग्रह में बच्चों, प्रकृति, देशभक्ति और प्रेम की कविताएं शामिल हैं.

इसी तरह सुचेता कृपलानी के रूप में उत्तर प्रदेश से देश को पहली महिला मुख्यमंत्री भी मिलीं. वह दो अक्तूबर 1963 से 13 मार्च 1967 के बीच मुख्यमंत्री पद पर रहीं.

भारत छोड़ो आंदोलन में बढ़-चढ़कर हिस्सा लेने वाली सुचेता कृपलानी महात्मा गांधी के साथ आजादी की लड़ाई में भागीदार बनीं.

लखनऊ में मेयर भले ही कोई महिला नहीं रही हो लेकिन यहां से लोकसभा के लिए तीन बार महिलाएं जीतकर पहुंची हैं. लखनऊ से शीला कौल 1971, 1980 और 1984 में चुनाव जीतकर लोकसभा पहुंची थीं.

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