धरना-प्रदर्शन में क्षति की तय हो जिम्मेदारी, मिले मुआवजा: SC

नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने धरना प्रदर्शन के दौरान सरकारी और निजी संपत्ति को नुकसान पहुंचाने पर चिंता जताई है। कोर्ट ने सरकार की इसकी जिम्मेदारी तय करने और मुआवजा दिए जाने का तंत्र विकसित करने का सुझाव दिया है।

कोर्ट ने सरकार से कहा है कि इसके लिए हर राज्य और केंद्र शासित प्रदेश में ट्रिब्यूनल या अदालत होनी चाहिए ताकि पीड़ित को मुआवजा मिल सके। ये सुझाव मंगलवार को न्यायमूर्ति आदर्श कुमार गोयल व न्यायमूर्ति यूयू ललित की पीठ ने केरल के एक वकील की याचिका का निपटारा करते हुए दिए।

पीठ ने कहा कि कोर्ट ने 2009 में धरना-प्रदर्शनों के बारे में गाइडलाइन तय की थीं, जिसमें इसकी वीडियोग्राफी कराने की भी बात कही गई थी। वहीं तोड़फोड़ करने वालों के खिलाफ कार्रवाई की बात थी। पीठ ने कहा कि लेकिन अभी ऐसा कोई तंत्र नहीं है, जो जिम्मेदारी तय करे और पीड़ित को मुआवजा मिले। हाई कोर्ट से मशविरा करके एक या दो जिला जजों को इसकी अतिरिक्त जिम्मेदारी भी दी जा सकती है

आपराधिक के साथ दीवानी जिम्मेदारी भी तय हो-

केंद्र सरकार की ओर से पेश अटार्नी जनरल केके वेणुगोपाल ने कहा कि 2009 की गाइडलाइन में कोर्ट ने कहा था कि प्रदर्शन के दौरान तोड़फोड़ करने वालों पर क्रिमिनल कार्रवाई होनी चाहिए। जो संगठन या पार्टी इसका आयोजन करती है, उसके नेताओं और सदस्यों पर तोड़फोड़ पर कार्रवाई होनी चाहिए।

पीठ ने कहा कि आपराधिक कार्रवाई के अलावा दीवानी जिम्मेदारी भी तय होनी चाहिए और मुआवजा मिलना चाहिए। कोर्ट ने कहा कि धरना प्रदर्शन के दौरान संपत्ति को नुकसान पहुंचाना आम हो गया है। इसके लिए एक समुचित तंत्र होना चाहिए जहां जाकर लोग कानून के तहत राहत पा सकें।

ड्राफ्ट तैयार, सुझाव मांगे हैं-

वेणुगोपाल ने पीठ को बताया कि सरकार सरकारी संपत्ति को नुकसान पहुंचाने के खिलाफ रोक अधिनियम में संशोधन ला रही है। इसका ड्राफ्ट तैयार हो चुका है। लोगों के सुझाव मंगाए गये हैं। गृह मंत्रालय को काफी सुझाव मिले भी हैं। इस पर पीठ ने कहा कि वे उम्मीद करते हैं कि सरकार कानून में संशोधन करते समय कोर्ट के सुझावों को भी शामिल करेगी।

वेणुगोपाल ने इस पर सहमति जताई। इसके साथ ही कोर्ट ने केरल के वकील कोशी जैकब की याचिका निपटा दी।

जैकब ने धरना-प्रदर्शन के कारण आंख के ऑपरेशन के बाद कई घंटे तक अस्पताल से घर न पहुंच पाने के एवज में मुआवजा मांगा था। हालांकि उसने प्रदर्शन करने वाले संगठन को पक्षकार नहीं बनाया था, इसलिए कोर्ट ने उसके बारे में कोई आदेश पारित नहीं किया।

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