पद्मिनी महल के बाहर शिलालेख को ढका, दर्ज है खिलजी के महारानी को देखने का वाकया

चितौड़गढ़ किले में स्थित पद्मिनी महल के बाहर एक शिलापट्ट को कपड़े से ढक दिया गया है। भारतीय पुरातत्व विभाग ने राजस्थान के संगठन श्री राजपूत करणी सेना की धमकियों के बाद ये कदम उठाया है। श्री राजपूत करणी सेना ने इस शिलापट्ट को हटाने की मांग की थी। दरअसल इस शिलापट्ट पर लिखा है कि पद्मिनी महल ही वो स्थान है जहां पर अलाउद्दीन खिलजी ने राजपूत महारानी पद्मिनी की एक झलक देखी थी। करणी सेना ने इस तथ्य पर आपत्ति जताई थी और इसे तुरंत यहां से हटाने की मांग की थी। करणी सेना की धमकी के बाद भारतीय पुरातत्व विभाग ने इस शिलापट्ट को लाल कपड़े से ढक दिया है। टीओआई की एक रिपोर्ट के मुताबिक इस शिलापट्ट को जोधपुर स्थित रिजनल ऑफिस से परमिशन के बाद ही ढका गया है। एक सीनियर अधिकारी ने नाम बताने की शर्त पर कहा कि पूरे किले में ये एकमात्र ऐसी जगह है जहां पर लिखा है कि खिलजी ने रानी पद्मावती को देखा था। बता दें कि फिल्म पद्मावती का विरोध कर रहा राजपूत समुदाय ऐसे किसी भी संदर्भ को हटाने या मिटाने की मांग कर रहा है, जिसमें ये वर्णन हो कि खिलजी ने रानी पद्मावती का दीदार किया था।

राजपूत समुदाय ने मांग की है कि पद्मिनी महल से आईनों को भी हटाया जाए। किंवदंती है कि अलाउद्दीन खिलजी ने आईने में पद्मावती का चेहरा देखा था। राजपूत समुदाय का कहना है कि आर्कियोलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया (ASI) को राजस्थान का आधिकारिक इतिहास फिर से लिखना चाहिए। राजपूत संगठनों ने किले में मौजूद गाइड्स को भी इस विवादित प्रकरण को सैलानियों को बताने से मना किया है। शुरुआत में एएसआई ने इस तरह की धमकियों को तवज्जो नहीं दी थी जिसके बाद कुछ असामाजिक तत्वों ने पद्मिनी महल के शीशों को तोड़ दिया। इसके बाद पद्मिनी महल को बंद कर दिया गया है। साथ ही स्थानीय गाइड भी अब आईना प्रकरण का जिक्र नहीं करते हैं।

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