प्राइवेट सेक्टर के कर्मचारियों के लिए खुशखबरी, 10 गुना तक बढ़ सकती है पेंशन

हरियाणा टूरिज्म कॉर्पोरेशन की 37 साल की नौकरी में प्रवीण कोहली के वेतन में कभी भी इतनी बढ़ोत्तरी नहीं हुई थी, जितनी की रिटायरमेंट के 4 साल बाद पेंशन की रकम में हुई। इस साल 1 नवंबर को प्रवीण की पेंशन की राशि में 10 गुना से भी ज्यादा बढ़ोत्तरी हुई, जिसके बाद उनकी पेंशन की रकम 2,372 रुपए से बढ़कर 30,592 रुपए हो गई। टाइम्स ऑफ इंडिया की एक रिपोर्ट के मुताबिक यह अप्रत्याशित बदलाव अक्टूबर 2016 के सुप्रीम कोर्ट के उस आदेश के बाद आया जिसमें अदालत ने कर्मचारी भविष्य निधि संस्था (EPFO) को कर्मचारी पेंशन योजना (EPS) के तहत 12 याचिकाकर्ताओं की पेंशन को रिवाइज करने का निर्देश दिया था।

कर्मचारी भविष्य निधि (EPF) के तहत आने वाली पेंशन योजना के करीब 5 करोड़ सदस्य हैं। प्राइवेट सेक्टर के हर कर्मचारी को अपनी बेसिक सैलरी में से 12 फीसदी सैलरी और महंगाई भत्ता (डीए) EPF में देना होता है। कंपनी (एंप्लॉयर) भी कर्मचारी के बराबर ही योगदान करती है। कंपनी के योगदान का 8.33% हिस्सा EPS को जाता है। नौकरी बदलने के दौरान या फिर बेरोजगारी के वक्त पर कर्मचारी अपना EPF निकालते हैं तब उन्हें EPS का पैसा नहीं दिया जाता है। यह पैसा केवल सेवानिवृत्ति के बाद ही दिया जाता है।

EPS में योगदान के लिए अधिकतम सीमा भी है। वर्तमान में यह सीमा सैलरी (बेसिक+डीए) पर 15 हजार रुपए प्रति माह है, इसलिए ऐसे में कोई भी 15,000 का अधिकतम 8.33% ही EPS में जमा कर सकता है, जो की 1,250 प्रतिमाह है। जुलाई 2001 और सितंबर 2014 के बीच EPS के लिए सैलरी कैप यानी योगदान की सीमा 6,500 प्रतिमाह थी, जिसमें EPS में अधिकतम 541.1 का ही योगदान हो सकता था। वहीं 2001 से पहले अधिकतम सीमा 5,000 रुपए थी, ऐसे में EPS में केवल 416.5 रुपए का ही योगदान होता था।

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