आयुध निर्माणी बोर्ड अध्यक्ष ने जाते जाते किया खुलासा…..

जबलपुर, विशेष प्रतिनिधि। शहर की व्हीकल फैक्टरी के पास अपना शानदार ढांचा है आटोमोबाइल क्षेत्र में विशेषज्ञता है। इसके बावजूद व्हीकल फैक्टरी और उसके उत्पादों को दबाव में नानकोर ग्रुप में डाला गया।

दबाव में व्हीएफजे को डाला ना कोर ग्रुप में

आयुध निर्माणी बोर्ड इसके लिए कतई तैयार नहीं था। उक्ताशय का खुलासा इसी माह 30 नवम्बर को सेवा निवृत्त हो रहे आयुध निर्माणी बोर्ड के अध्यक्ष एवं महानिदेशक एसपी बाजपेयी ने व्हीएफजे श्रमिक प्रतिनिधियों के बीच किया। बताया गया कि सरकार के निर्देश पर आयुध निर्माणियों का वर्गीकरण करने के लिए एक समिति बनाई गयी थी। जिसमें बोर्ड के वरिष्ठ सदस्य एस के चौरसिया जो आगामी 1 दिसंबर से आयुध निर्माणी बोर्ड के चेयरमेन बनने जा रहे हैं, उनकी अध्यक्षता में समिति गठित की गयी थी जिसमें रक्षा मंत्रालय के सचिव के साथ डीजीक्यूए निदेशक सेना के अधिकारी और बोर्ड के दो सदस्य शामिल थे। व्हींएफजे के मुद्दे पर अन्य सदस्यों ने इसे नानकोर में डालने की सिफारिश की थी जबकि बोर्ड के सदस्यों ने इसका पुरजोर विरोध करते हुए तर्क दिया कि व्हीएफजे के पास तमाम तरह की तकरीकी क्षमता और विशेषज्ञता है। उसका सक्षम इन्फ्रा स्ट्रेक्चर है। उत्पादन की क्षमता है। सेना की ओर से भी ग्राहक के नाते आपूर्ति और सेवा में कोई कमी की शिकायत नहीं की गयी है। इतना ही नहीं देश की एक मात्र आटोमोबाइल आयुध निर्माणी है जो विगत 50 वर्षों से सेना को निर्वाधित मांग के अनुरूप वाहनों की आपूर्ति कर रही है। इन सब तर्कों केा दर किनार रखते हुए समिति के अन्य सदस्य इसे नानकोर गु्रप में शामिल करने के लिए अपना मत व्यक्त कर रहे थे। तब मजबूरी वश समिति के अध्यक्ष बोर्ड सदस्य एस के चौरसिया ने बोर्ड के अभिमत के साथ समिति की सिफारिश पर हस्ताक्षर किये। इस खुलासे के बाद अध्यक्ष ने फिर भी उम्मीद जताई है कि व्हीएफजे की अपनी क्षमता और विशेषज्ञता के चलते सेना पुनः व्हीएफजे के उत्पाद को ही अंततः पसंद कर इससे आपूर्ति चाहेगी। दूसरी ओर श्रमिक संघों के प्रतिनिधियों ने कहा कि कोर और नानकोर में विभाजित करने के निर्णय करने वाली समिति की सिफारिश सार्वजनिक की जाये ताकि आम नागरिक यह जान सकें कि ऐसी क्या मजबूरी थी जिसके चलते व्हीएफजे के उत्पादों को नानकोर ग्रुप में डाल दिया गया।

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