लोकायुक्त न्यायमूर्ति नरेश कुमार गुप्ता की नियुक्ति को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती

भोपाल । देश में लोकायुक्तों और उप लोकायुक्तों की नियुक्ति के लिए एक समान निर्देश बनाने के लिए सुप्रीम कोर्ट में एक याचिका दायर की गई है।

यह याचिका मध्य प्रदेश के एक पूर्व पुलिस महानिदेशक अरुण गुर्टू ने दायर की है। गुर्टू भोपाल सिटीजन्स’ फोरम के संयोजक भी हैं। उन्होंने अपनी याचिका में कहा है कि अभी तक सिर्फ 21 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में ही लोकायुक्त क़ानून है। इसके अलावा, इन सभी राज्यों में लोकायुक्तों की नियुक्ति के अलग अलग तरीके हैं। कुछ इसका पूरा अधिकार मुख्य न्यायाधीश को देते हैं जबकि कुछ राज्यों में नियम है कि मुख्य न्यायाधीश और विपक्ष के नेता के बीच विचार विमर्श से यह नियुक्ति हो। कुछ राज्यों में राज्य विधानसभा का अध्यक्ष और मुख्यमंत्री भी इस प्रक्रिया में शामिल होते हैं।

याचिका में मध्य प्रदेश के लोकायुक्त न्यायमूर्ति (अवकाशप्राप्त) नरेश कुमार गुप्ता की नियुक्ति को चुनौती दी गई है।

गुर्टू ने मध्य प्रदेश लोकायुक्त और उप लोकायुक्तअधिनियम, 1981 की धारा 3 का उल्लेख किया है जिसके तहत प्रावधान है कि लोकायुक्त की नियुक्ति मुख्यमंत्री, हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश, और विधानसभा में विपक्ष के नेता के बीच उचित परामर्श से होगी। उन्होंने याचिका में कहा है कि न्यायमूर्ति गुप्ता की नियुक्ति में इस तरह की प्रक्रिया नहीं अपनाई गई और नियुक्ति के लिए उनके सिवा किसी और का नाम नहीं था।

याचिका में अजित कुमार बनाम झारखंड राज्य और अन्य (2002) 2 JLJR 353 (HC), मामले का हवाला दिया गया है जिसमें कहा गया गया था कि किसी एक व्यक्ति के नाम पर विचार करना और उसको ही नामित करना इस अधिनियम की भावना के अनुरूप नहीं है।

याचिका में कहा गया है कि उप-लोकायुक्त जो कि लोकायुक्त के पद के रिक्त होने के बाद से संगठन का काम देख रहे थे, उनकी अनदेखी की गई है और न्यायमूर्ति गुप्ता की नियुक्ति की गई है जो उनसे छह साल कनिष्ठ हैं।

याचिका में मांग की गई है कि न्यायमूर्ति गुप्ता की नियुक्ति से संबंधित सभी पत्राचार और रिकार्ड्स सार्वजनिक किए जाएं और उनकी नियुक्ति रद्द की जाए।

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