रेत उठाने के लिए मिलेंगे चार घंटे, अवैध खनन रोकने का उपाय नहीं

भोपाल। नई रेत खनन नीति में रॉयल्टी जमा करने के बाद व्यक्ति को जो ऑनलाइन मांग पत्र जारी होगा। इसके चार घंटे के भीतर उसे खदान से रेत उठानी होगी। साथ ही उस वाहन का नंबर भी देना होगा, जिससे वह रेत ले जाएगा। यदि कहीं सरपंच आपूर्तिकर्ता से सांठगांठ कर रेत का अवैध खनन करता है तो उसे रोकने के उपाय नीति में नहीं है। सड़क पर रेत परिवहन करते डंपरों की जांच भी नहीं होगी।

जब इसको लेकर खनिज मंत्री राजेंद्र शुक्ल से पूछा गया तो उन्होंने कहा कि खदान पर पंचायतें निगरानी करेंगी। एक जिले में 20 से ज्यादा खदान होने पर संविदा आधार पर प्रबंधक की नियुक्ति होगी, जो समन्वय का काम करेंगे। तयशुदा मात्रा से ज्यादा रेत न निकले, इसके लिए साल में दो बार सर्वे करने किया जाएगा।

इसकी रिपोर्ट जिला पंचायत को सौंपी जाएगी। नीति लागू होने के बाद सरकार को उन ठेकेदारों को लगभग डेढ़ सौ करोड़ रुपए लौटाने होंगे, जो सुरक्षा के तौर पर खनिज निगम के पास जमा हैं। दरअसल, जो खदानें नीलाम हुईं और स्वीकृति नहीं मिलने से शुरू नहीं हो पाईं, उसकी राशि लौटाई जाएगी।

रोजगार के मौके बढ़ेंगे: राजेंद्र शुक्ल

खनिज मंत्री राजेंद्र शुक्ल ने बताया कि नई नीति से रेत तो सस्ती होगी ही रोजगार के मौके भी बढ़ेंगे। स्थानीय स्तर पर रेत निकालने और परिवहन के काम में लोग लगेंगे। इससे रोजगार पैदा होगा। वहीं, आपूर्ति बढ़ने से दाम भी घटेंगे। पंचायतों को जो राशि मिलेगी, उससे विकास के कामों में गति आएगी। रेत उत्खनन की मात्रा पर नजर रखने के लिए वाहनों में जीपीएस सिस्टम को अनिवार्य किया जाएगा। एक सवाल के जवाब में उन्होंने कहा कि हमारे लिए राजस्व महत्वपूर्ण नहीं है, इसलिए नर्मदा नदी में मशीन से रेत खनन प्रतिबंधित रहेगा।

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