हायर सेकंडरी स्कूलों को डी या ई ग्रेड मिली तो प्राचार्यों पर गिरेगी गाज

जबलपुर,यभाप्र। स्कूल शिक्षा विभाग ने सितंबर से प्रदेशभर के हाई स्कूल और हायर सेकंडरी स्कूलों को ग्रेड देना शुरू किया है। इसके लिए स्कूलों को एमपीएसडीसी पोर्टल पर ऑनलाइन एंट्री करना है। अक्टूबर की रेटिंग के लिए फॉर्म भरे जा रहे हैं।

रुक सकता है एक-एक इंक्रीमेंट भी

इस महीने के आखिर में रिजल्ट आएगा। अब हायर सेकंडरी स्कूलों की कमजोर रेटिंग के लिए सीधे तौर पर प्राचार्य जिम्मेदार होंगे। यदि ग्रेड नहीं सुधरी तो उन्हें वेतन में भी नुकसान उठाना पड़ सकता है। ग्रेडिंग के लिए तय मापदंडों के मुताबिक यदि जिले की ग्रेडिंग 50 फीसदी से कम है तो उसे शून्य माना जाएगा। कई मामलों में ग्रेडिंग काफी कम रही है, इसलिए उसे नंबर नहीं मिल पाए। जिले को डी ग्रेड मिली थी। इसीलिए अब छात्रवृत्ति, समग्र आईडी, साइकिल वितरण, आत्मरक्षा प्रशिक्षण और युक्तियुक्तकरण की जानकारी अपडेट की जा रही है। अब डी या ई ग्रेड में आए तो प्राचार्य का एक-एक इंक्रीमेंट भी रुक सकता है।
रेटिंग में सुधार के लिए विभाग गंभीर हो गया है।
स्कूलों की ग्रेड तय करने के पीछे विभाग का मकसद स्कूलों में भौतिक और शैक्षणिक वातावरण विकसित करना है। अधिकारियों के मुताबिक रेटिंग स्कूलों को आईना दिखाएगी। वे अच्छा करने के लिए प्रेरित होंगे। स्कूलों में बेहतरी के लिए कदम उठाए जा सकेंगे। इससे पढ़ाई का स्तर सुधरेगा, जिसका फायदा विद्यार्थियों को मिलेगा।
इनसे बड़ी सुधार की उम्मीद – सितंबर की ग्रेडिंग में युक्तियुक्तकरण शामिल नहीं था। अफसरों का कहना है ज्यादातर प्राचार्य कम्प्यूटर फ्रेंडली नहीं हैं। कुछ ने लापरवाही में एंट्री नहीं की। अब वे भी एंट्री करेंगे। टीचर्स ट्रेनिंग भी पूरी है। इससे रेटिंग में सुधार की उम्मीद जगी है।

 

 

 

 

 

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *