डायवर्सन शुल्क की वसूली में सरकार का कम अधिकारियों का ज्यादा भर रहा खजाना

जबलपुर, नगर प्रतिनिधि। प्रदेश सरकार ने पूरे प्रदेश के जिला प्रमुखों को डायवर्सन शुल्क वसूलने का आदेश दिया था। जिसका कारण है प्रदेश सरकार का खाली हो चुके खजाने को फिर से भरना जिसके चलते जबलपुर कलेक्टर महेशचंद्र चौधरी ने भी राजस्व अधिकारियों की बैठक लेकर ज्यादा से ज्यादा राजस्व वसूली के लिए हवा भरी जिसके चलते पूरे जिले का राजस्व अमला अपना काम छोड़कर डायवर्सन शुल्क की वसूली के लिए गली गली घूमने लगा लेकिन अब जो बात सामने आ रही है वो यह है कि विभाग कुछ खास लोगों पर तो दया कर रहा है लेकिन कुछ पर घुटना रखकर वसूली हो रही है।

खास के रियायत, आम की फजीहत
पहुंच वालों को छूट
इस पूरे मामले में जमकर राजनैतिक हस्तक्षेप भी हो रहा है क्योंकि इसके कारण जनप्रतिनिधि खासे नाराज हैं। विपक्ष तो बोलकर अपनी खीज निकाल लेता है लेकिन सत्तापक्ष मजबूरी में खामोश है लेकिन पर्दे के पीछे से अपने लोगों को फायदा पहुंचा रहा है। ज्यादातर मामलों में जिनकी पहुंच है उन्हें डायवर्सन शुल्क में 80 प्रतिशत तक की छूट मिल रही है। जिन्होंने दस साल से डायवर्सन शुल्क नहीं दिया है उनकी दुकानें एक या दो साल पुरानी बताकर पुराना शुल्क छोड़ा जा रहा है।
यहां से पूर्ति
प्रदेश सरकार ने प्रत्येक स्तर पर लक्ष्य निर्धारित किया हुआ है जिसके चलते प्रत्येक राजस्व मंडल को अपना लक्ष्य पूरा करना है जिसको लेकर अधिकारी जमकर टैक्स लगा रहे हैं लेकिन खास लोगों को छोड़ने के चलते उनके हिस्से का पैसा आम लोगों के सर मढने का भी खेल खुले आम चल रहा है क्योंकि अधिकारियों को तो सिर्फ अपना लक्ष्य पूरा करना है पैसा चाहे कैसे भी आए।
जेब हो रहीं गरम
इस पूरी कवायद के बीच पूरे जिले का राजस्व अमला डायवर्सन शुक्ल वसूली में लगा हुआ है। एक तरफ जहां सरकार का खजाना भर रहा है वहीं दूसरी तरफ इसमें लगे कुछ लोग भी अपनी जेब भरने में जुटे हैं। जानकारी के मुताबिक पटवारी, आरआई के साथ साथ कुछ बड़े अधिकारी भी पूरे खेल का हिस्सा हैं। जहां शुल्क कम करने को लेकर हो या फिर डायवर्सन एरिया घटाने को लेकर। सभी जगह जमकर तोल-मोल चल रहा है।

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